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ऊंटनी नहीं गाय-भैंस दूध की मिठाई लें दीपावली पर

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राजस्थान और दिल्ली से मंगायी बासी मिठाई से बचें.

दीपावली पर मिष्ठान का विशेष महत्व है। हमारे देश में हर्षोल्लास के मौके पर मुंह मीठा करने और कराने की परंपरा रही है। दीपों का पर्व बिना मिष्ठान के संपन्न होना संभव ही नहीं है। मिलावटी और निम्न स्तरीय मिष्ठानों का बाजार बढ़ता जा रहा है। त्योहारों के मौके पर इस तरह की मिठाईयों की भरमार रहती है। रंग-बिरंगी मिठाईयां, जिनमें खतरनाक रंग तथा नकली खोवा आदि इस्तेमाल होता है, यूं ही खरीदी जाती हैं। जिनके कारण लोग बीमार पड़ जाते हैं।

नगर में भी इस मौके पर जगह-जगह मिठाईयां बिकती दिखने लगी हैं। कई जनरल स्टोर दिल्ली तथा राजस्थान से मिठाईयां पैक कर हफ्तों पूर्व मंगा कर रख लेते हैं। इन्हें महीनों पूर्व ऑर्डर दिया जाता है। रंगीन और आकर्षक पैक में कहीं हल्दीराम, कहीं बीकानो, कहीं बीकानेरवाला आदि ब्रांडेड पैकिंग में सजी मिठाईयों की भरमार अभी से दुकानों में होने लगी है। राजस्थान में गाय-भैंस के बजाय ऊंट-बकरियां ही अधिक पाले जाते हैं। ऐसे में संभव है कि इन पशुओं के दूध का इस्तेमाल ही वहां अधिक होता होगा। अपने यहां गाय-भैंस का ताजा दूध उपलब्ध है। ऊंट-बकरियों के दूध या घी से बनी मिठाईयों के मुकाबले हमें गाय-भैंस के दूध से बनी मिठाईयां ही खरीदनी चाहिएं। महीनों पहले बनी राजस्थान और दिल्ली की मिठाईयों से बचना होगा।

शंभू स्वीट्स पर लोगों को भरोसा :
थाना चौक के पास शंभू स्वीट्स नामक विश्वसनीय मिष्ठान विक्रेता हैं। देसी घी और शुद्ध ताजा दूध ही यहां इस्तेमाल होता है। सदियों से इस दुकान का अपना पैमाना है, जो स्वाद और शुद्धता पर हमेशा खरा उतरता है। जिस पेड़े ने गजरौला का नाम देश भर में फैलाया है, उस पेड़े की उत्पादक यही फर्म है। जितनी मिठास और स्वाद इनकी मिठाईयों में है, उतनी ही इस फर्म के स्वामी अरविन्द अग्रवाल की भाषा शैली में भी है। यहां स्वाद, शुद्धता, प्रेम और विश्वास का बेजोड़ संगम है। यही कारण है कि लोग यहां स्वतः ही खिंचे चले आते हैं।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.


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