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बैंकों में नोट बदली से भ्रष्टाचार बढ़ा

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बैंकों के अधिकांश पैसे को कौन लोग ले जा रहे हैं तथा बैंक प्रबंधक, कैशियर या संबंधित कर्मचारी कैसे धांधली को अंजाम दे रहे हैं?

बैंकों में नोट बदल नीति ने बैंकों में भ्रष्टाचार बढ़ाने का काम किया है। बिना सोचे या बिना गंभीर विचार किये लिया गया यह फैसला अबतक साठ लोगों की जान ले चुका और भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा आघात कर रहा है।

चारों ओर से समाचार मिल रहे हैं कि सरकारी आदेश के बावजूद बैंकों से लोगों को केन्द्र सरकार के आदेशों के मुताबिक धन मुहैया नहीं किराया जा रहा। जबकि अनेक आढती, बड़े व्यापारी और कमीश्नखोर बैंकों से मनचाहा धन निकालने में सफल हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसके लिए देर शाम आम आदमी को बैंक में नोट खत्म होने का नाटक कर बाहर कर दिया जाता है और गिने-चुने पूंजीपति, आढती, व्यापारी और कमीशनखोरों को बाद में भुगतान किया जा रहा है। सरकार का आदेश है कि शादी के लिए एक बार में ढाई लाख तक कैश दिया जा रहा है। बैंककर्मी यह कहकर दस-बीस हजार रुपये देकर लोगों को टरका रहे हैं कि जब पैसा ही नहीं, तो वे कहां से दें। यही अच्छा है कि सभी लोग मिल बांटकर काम चला लें।

यह देखने वाला कोई नहीं कि बैंक में कितना धन है और जरुरतमंदों को वांछित पैसे क्यों नहीं मिल रहे। बैंकों के अधिकांश पैसे को कौन लोग ले जा रहे हैं तथा बैंक प्रबंधक, कैशियर या संबंधित कर्मचारी कैसे धांधली को अंजाम दे रहे हैं?

जो दो हजार का नया नोट सरकार ने जारी किया है। वह भी पूंजीपतियों के ही काम का है। आम आदमी बुरी तरह परेशान है। अब उसका धैर्य भी टूट रहा है। इसी के साथ लोग इस चर्चा में संलग्न रहने लगे कि नोटबंदी का उत्तर प्रदेश के चुनाव पर क्या प्रभाव डालेगा?

-जी.एस. चाहल.


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