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हमारी प्राचीन सांस्कृतिक पहचान का गवाह है गंगा मेला

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गंगा भारतीय सांस्कृतिक धार्मिक महत्व के साथ आर्थिक महत्व भी रखती है. प्रति वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का महत्व पुराणों सहित सभी धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है.

कार्तिक पूर्णिमा पर सप्ताह भर लगने वाला गंगा मेला तिगरी को महत्वपूर्ण तीर्थस्थल का श्रेय प्रदान करता हैै। लोग यहां केवल धार्मिक श्रद्धाभाव और कई कर्मकांड संपन्न कराने ही नहीं आते बल्कि पर्यटन, मनोरंजन और भरपूर आनंद प्राप्त करने की भूख भी उन्हें तिगरी के गंगा तट की ओर खींचने को विवश करती है। जहां उम्रदराज स्त्री पुरुष श्रद्धावश यहां आते हैं वहीं युवक युवतियां मनोरंजन और आनंद के लिए इधर बरबस आकर्षित होते हैं। बच्चे खानपान की चीजों, पानी और रेत में क्रीड़ा करने तथा खेल तमाशों की लालसा में तंबुओं की नगरी में आना पसंद करते हैं।

गंगा भारतीय सांस्कृतिक धार्मिक महत्व के साथ आर्थिक महत्व भी रखती है। प्रति वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान का महत्व पुराणों सहित सभी धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है। जन्म से मृत्यु तक हिन्दु धर्म के अधिकांश संस्कार तो गंगा के सहारे संपन्न होते ही हैं लेकिन मृत्यु के बाद भी ब्राह्मणों ने हिन्दुओं का नाता इस पवित्र नदी से जोड़े रखा है।

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लोग मृत्यु को प्राप्त कर चुके अपने परिजनों की सदगति अथवा मुक्ति के लिए गंगा की शरण लेते आये हैं जो क्रम आज भी जारी है। मान्यता है कि मृत्यु के बाद पहली पूर्णिमा पर गंगा में दीपदान कर जहां मृतक मुक्ति प्राप्त करता है वहीं मृतक के परिजन भी उससे उऋण हो जाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान करने वालों की भारी संख्या होती हैं। दूसरी पूर्णिमाओं से इस कर्मकांड के लिए कार्तिक पूर्णिमा अधिक फलदायी मानी गयी है। नवजात शिशुओं का मुंडन, नवविवाहित का स्नान और संतान प्राप्ति की कामना, बिगड़े काम बनने जैसी न जाने कितनी मनौतियों से संबंधित कर्मकांड यहां संपन्न होते हैं। हिन्दु धर्म की मान्यताओं में मानव का अंतिम संस्कार गंगा नदी के तट पर करके उसकी राख और अस्थियां गंगा में प्रभावित करने से उसे स्वर्गधाम प्राप्त होता है। यही कारण है कि मृतकों के शव गंगा तट पर अंतिम संस्कार को लाया जाता है।

मेले से हजारों परिवारों का रोजगार भी जुड़ा है। आम जरुरत की चीजों से लेकर मनोरंजन और आभूषण आदि के व्यवसायी यहां दुकानें लगाते हैं तथा काफी कमायी करके घर लौटते हैं। सदियों से तिगरी का गंगा तट जहां लाखों लोगों की श्रद्धा, मनोरंजन और रोजगार का केन्द्र बना है वहीं यह हमारे देश की प्राचीन सांस्कृतिक पहचान को बनाये हुए है।

-जी.एस. चाहल.


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