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नोटबंदी से नाराज लोगों के बीच जाने का साहस नहीं जुटा पा रहे भाजपा नेता

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विधानसभा चुनावों से पूर्व नोटबंदी का कदम भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है.


प्रधानमंत्री द्वारा नोटबंदी की सीमा का समय घट रहा है लेकिन बैंकों में लगी कतारों का आकार कम होने के बजाय बढ़ रहा है। जिससे सरकार की मंशा पर जनता का संदेह भी बढ़ता जा रहा है।

जो लोग 8 नवंबर को हुई नोटबंदी की घोषणा के बाद से खुशी महसूस कर रहे थे, वे अब दुखी दिखाई दे रहे हैं बल्कि सरकार को पेट पकड़कर कोसने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इससे उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों में सरकार का यह कदम भाजपा के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है।

ढाई साल से अच्छे दिन आने के इंतजार में लोगों को बुरे दिन देखने से उनका केन्द्र सरकार विशेषकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ गुस्सा सातवें आसमान पर है।

इससे केवल निम्न और मध्य वर्ग को ही परेशानी नहीं बल्कि भाजपा के सांसदों और भावी प्रत्याशियों को उनसे भी अधिक मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। इसी सप्ताह यहां आये सांसद कंवर सिंह तंवर के साथ पूर्व एमएलसी डा. हरि सिंह ढिल्लो, पालिकाध्यक्ष हरपाल सिंह, जिलाध्यक्ष ऋषिपाल सिंह नागर, सभासद सुरेन्द्र औलख, बीडीसी सदस्य वीरेन्द्र सिंह तथा जिला महामंत्री राजीव तरारा समेत जिले के चुनिंदा नेता ही एकत्र हो पाये।

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यहां एक पेट्रोल पंप पर भाजपा का कार्यालय खोल गया है। इतने महत्वपूर्ण मौके पर कार्यकर्ता तो पहुंचे ही नहीं बल्कि चंद पदाधिकारियों ने ही एक फूल माला को संयुक्त रुप से पहनकर कार्यालय का उद्घाटन कर लिया।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री के परिवर्तन रैली के कार्यक्रमों की तैयारी चल रही है। जिनमें केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह का न पहुंचना भी नोटबंदी से नाराज लोगों के सामने पहुंचने का एक बड़ा कारण है।

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वरुण गांधी जैसे कद्दावर नेता भी भांप गये हैं कि लोग नोटबंदी से बेहद परेशान हैं और भाजपा नेताओं की खबर लेने को तैयार बैठे हैं। गांधी भी सभाओं और रैलियों से बचना चाह रहे हैं।

कानपुर जैसे महानगर में हुई प्रधानमंत्री की जनसभा में पार्टी द्वारा बाहर से बसों में भरकर लाये हुए ही अधिक लोग थे। जबकि स्थानीय लोगों का अभाव था तथा नोटबंदी की कथा शुरु होते ही पीछे बैठे लोग स्वतः खिसकते चले गये। हालात को परख प्रधानमंत्री थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पी-पी कर मुश्किल और मुझे मन से भाषण देने को बाध्य दिखे।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.


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