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नोटबंदी के रोज नये नियमों से लोग भ्रम की स्थिति में हैं

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सरकार की अधूरी तैयारी की वजह से यह स्थिति उत्पन्न हो रही है और यह आगे भी रह सकती है.


नोटबंदी का समय भारत की जनता के लिए महंगा साबित होता जा रहा है। जहां एक ओर लोग सरकार को दोषी ठहरा रहे हैं, वहीं रोज नये नियमों की घोषणा होने से लोग दुखी भी हैं। लेकिन क्या करें नियम का पालन तो करना पड़ेगा।

लोगों का कहना भी है कि यह भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है। यह पता नहीं रहता कि अगले घंटे कौन सा नया नियम आ जायेगा या पुराना नियम कब तक चलेगा।

जानकारों का मानना है कि सरकार ने नोटबंदी का जो फैसला लिया था, उसकी तैयारी अधूरी थी।

सोमवार को आये नये नियम के तहत केवल पांच हजार की राशि एक बार में जमा हो सकती है। यानि 30 दिसंबर तक केवल एक बार में आप पांच हजार रुपये नकद जमा कर सकते हैं। यह नियम सिर्फ पुराने नोटों को लेकर है।

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पहले कहा गया था कि 30 दिसंबर तक कभी भी और कितने भी पुराने नोट जमा कराये जा सकते हैं। अब उसे बदल दिया गया है।

30 दिसंबर के बाद पुराने नोट जमा नहीं होंगे। लोग इस समय भ्रम की स्थिति में हैं और सरकार को कोसने पर मजबूर भी हैं।

यदि आपके पास पुराने नोटों में रकम पांच हजार से कम है तो उसे अलग-अलग समय पर बैंक में जमा किया जा सकता है. मगर पांच हजार से ज्यादा पर आप ऐसा नहीं कर सकते.

यदि आप 5000 रुपये से ज्यादा के पांच सौ और हजार के पुराने नोट बैंक में जमा करने जायेंगे तो आपको बैंक अधिकारियों को संतुष्ट करना होगा कि आपने अभी तक यह रकम जमा क्यों नहीं करवायी? यदि वे आपकी बात से सहमत हैं तो आपकी रकम जमा हो सकती है अथवा नहीं। यदि उन्हें गड़बड़ लगी तो आप पर कार्यवाही भी हो सकती है।

जानकारों का साफ तौर पर कहना है कि नोटबंदी की वजह से केन्द्र सरकार और भारत की बैंकिंग प्रणाली पर जनता सवाल उठा रही है। लोग भ्रम की स्थिति में हैं और ऐसा लगता है जैसे लोग 30 दिसंबर के बाद भी भ्रम में ही रहने वाले हैं।

-गजरौला टाइम्स स्टाफ.


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