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रिपोर्ट के मुताबिक एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से 86 फीसदी नोटों को हटाने की घोषणा करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रतिष्ठा और लोकप्रियता दोनों को दांव पर लगा दिया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की योजना अपने छह भरोसेमंद नौकरशाहों के साथ तैयार की थी. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक इसकी गोपनीयता बनाए रखने के लिए राजस्व सचिव हंसमुख अधिया और पांच अन्य नौकरशाहों को गोपनीयता की शपथ दिलाई गई थी. इस घटनाक्रम से परिचित सूत्रों ने बताया कि इस योजना का खाका दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास में खींचा गया. इसमें शोधकर्ताओं की एक टीम भी शामिल रही.

इसकी गोपनीयता का मकसद नकदी के रूप में जमा काले धन को सोना या अन्य चीजों में लगने से रोकना था. रिपोर्ट के मुताबिक एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से 86 फीसदी नोटों को हटाने की घोषणा करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी प्रतिष्ठा और लोकप्रियता दोनों को दांव पर लगा दिया है. इस घोषणा से ठीक पहले हुई कैबिनेट की बैठक में उन्होंने कहा था कि ‘मैंने हर तरह की जांच-पड़ताल कर ली है और अगर कुछ भी गलत होता है, उसके लिए जिम्मेदार मैं ही हूं.’ यह जानकारी इस बैठक में शामिल रहे तीन मंत्रियों ने दी है.

नोटबंदी के बाद बने हालात को लेकर वित्त मंत्रालय के कुछ अधिकारियों ने योजना को त्रुटिपूर्ण बताया है क्योंकि इसके तहत समय से पहले नोटों की छपाई शुरू नहीं की जा सकी. कुछ आलोचकों ने अधिया और उनकी टीम पर योजना बनाते समय बाहरी लोगों की सलाह को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया. वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक में काम कर चुके एक अधिकारी ने इस रिपोर्ट में कहा है, ‘वे जानते ही नहीं कि असल दुनिया में क्या हो रहा है.’

प्रधानमंत्री द्वारा अधिया को चुने जाने के पीछे उनके बीच का भरोसेमंद संबंध है. 58 वर्षीय अधिया गुजरात में 2003 से 2006 तक उनके प्रधान सचिव रहे चुके हैं. उन्हें सितंबर 2015 में राजस्व सचिव बनाया गया था जहां उनके प्रमुख अरुण जेटली थे लेकिन इसके साथ ही वे हमेशा प्रधानमंत्री मोदी के सीधे संपर्क में रहे हैं.

-सत्याग्रह से साभार


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