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संयमित जीवन शैली से संभव है शुगर पर काबू

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आरामतलब लाइफस्टाइल, खानपान की गड़बड़ी और एक्सरसाइज की कमी के कारण डायबिटीज की बीमारी भारत में एक बड़ी समस्या का रूप लेती जा रही है.

इस समय देश में करीब सात करोड़ लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं और एक बड़ी आबादी पर इसका खतरा मंडरा रहा है। परंतु एक संयमित जीवन शैली अपनाकर इस बीमारी पर नियंत्रण पाना संभव है। उक्त विचार जिंदल हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ.बी.एस.जिंदल ने आयोजित शिविर में व्यक्त किये।

मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ.जिंदल ने कहा कि इस रोग में सिर्फ योग से काम नहीं चलेगा, नियमित व्यायाम के साथ दवा भी जरूरी है। हालांकि डायबिटीज को पूरी तरह से खत्म तो नहीं किया जा सकता लेकिन इसे कंट्रोल में रखा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि अपने डॉक्टर से सलाह लें और खासतौर से सर्दियों में समय समय पर शुगर लेवल का चेकअप करवाते रहें।

समाज को डायबिटिज़ मुक्त बनाने की दिशा में नगर के जिंदल हॉस्पिटल में प्रसिद्द दवा निर्माता कम्पनी एमिल फार्मास्युटीकल (इंडिया) लिमिटेड के सौजन्य से एक विशाल डायबिटिज़ कैम्प का आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्घाटन करते हुए नगर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ.एच.के.गर्ग ने बताया कि जिंदल हॉस्पिटल का यह प्रयास काफी सराहनीय है। शुगर की निशुल्क जांच कराकर काफी लोगों को अपने शरीर में शुगर के स्तर का पता चलेगा और बढ़ा हुआ पाए जाने पर उस पर नियंत्रण के आसान टिप्स भी मिलेंगे। इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों के मन में उठने वाली शंकाओं का समाधान भी किया जा सकेगा। डॉ.गर्ग ने बताया कि मौसम बदलने साथ ही हर बीमारी का रूप भी बदलता है। कहने को तो डायबिटीज एक आम बीमारी हो गई है लेकिन अब भी डायबिटीज के ज्यादातर मरीजों को ठंड में डायबिटीज से बचने के तरीके नहीं पता। यही कारण है कि सर्दियों में मरीजों के लिए अपनी डायबिटीज को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है और उनकी बीमारी बढ़ती चली जाती है।

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जिंदल हॉस्पिटल के चिकित्साधिकारी डॉ.दिलबाग जिंदल ने इस बीमारी के बारे में बताते हुए कहा कि डायबिटीज जिसे हिंदी में शुगर या मधुमेह कहा जाता है, एक लाइफस्टाइल संबंधी एवं वंशानुगत बीमारी है। जब पैंक्रियाज नामक ग्लैंड शरीर में इंसुलिन नामक हार्मोन बनाना कम कर देता है या बंद कर देता है, तो यह बीमारी हो जाती है। इंसुलिन हार्मोन ब्लड में ग्लूकोज को कंट्रोल करने में मदद करता है।

इस जटिल बीमारी के लक्षणों के बारे में समझाते हुए डॉ.जिंदल ने बताया कि आंखों की रोशनी लगातार कम होना, वजन बार-बार बढ़ना या कम होना, हर समय कमजोरी महसूस होना, चोट लगने पर जल्दी ठीक न होना, त्वचा के रोग होना, भूख बहुत ज्यादा बढ़ जाना आदि किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें। यदि आपको यह बीमारी है, तो लापरवाही बरतना अपनी जिंदगी से खिलवाड़ करने जैसा साबित हो सकता है। इसके लिए तुरंत इलाज शुरू करें।

डायबिटीज के कारणों के बारे में जानकारी देते हुए जिंदल हॉस्पिटल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.राधा जिंदल ने कहा कि डायबिटीज के बारे में जानने के साथ ही इसके कारणों पर ध्यान देना भी जरूरी है। ज्यादा वजन, व्यायाम की कमी, ज्यादा तनावग्रस्त रहना अथवा परिवार में पहले से ही किसी को डायबिटीज होना इस बीमारी के प्रमुख कारण हैं। लापरवाही में अगर ब्लड शुगर लगातार बढ़ता रहे तो इससे किडनी खराब होने जैसी कई घातक बीमारियां भी हो सकती हैं। इसके अलावा सर्दियों में अगर ख्याल न रखा जाए तो डायबिटीज के मरीजों में हार्ट अटैक और दूसरी दिल की बीमारियां होने की संभावना चार गुना तक बढ़ जाती है। इसलिए जरूरी है कि इसके लक्षण जान कर फौरन इसका इलाज किया जाए।

अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली से पधारी डायबेटिक एजूकेटर डॉ.अनुप्रिया ने उपस्थित रोगियों को उनके शुगर लेवल के अनुसार खान-पान की सलाह दी। उन्होंने आगाह किया कि मार्केट में प्रचलित शुगर फ्री गोलियों एवं मिठाइयों आदि के अति प्रयोग से बचें। उनके सेवन से उतनी ही कैलोरी और शुगर बढ़ती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शुगर से पीड़ित लोग सर्दियों में खाने का खास ख्याल रखें। तीन बार भारी भोजन करने की बजाय चार-पांच बार हल्का खाना खाएं। जंक फूड बिल्कुल न खाएं एवं सोने से करीब दो घंटे पहले कुछ न खाएं। उन्होंने बताया कि डायबिटीज के मरीजों के भोजन में फाइबर की एक संतुलित मात्रा होनी चाहिए तथा इन्हें उपवास नहीं रखना चाहिए।

पूर्णतया निशुल्क इस शिविर में करीब 260 रोगियों की शुगर, ब्लड प्रेशर की जांच कर उन्हें विशिष्ट चिकित्सकीय परामर्श तथा आहार सलाह प्रदान की गयी। कार्यक्रम में मुख्य रूप से कमलेश जिंदल, एमिल कम्पनी के एरिया सेल्स मैनेजर केवेंद्र सिंह, एम.आर. मुकेश कुमार, महिपाल सिंह, डा.कृष्णदेव, डा.तान्या, डा.संदीप आर्य, प्रणव, दीपिका, नविता, नयना, सोनू सैनी, मोहित कुमार, ममता, धरमपाल सिंह, प्रियंका चौहान, सावित्री देवी, कुलवीर सिंह आदि मौजूद रहे।

-टाइम्स न्यूज़ मंडी धनौरा.


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