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जाटों को सपा से जोड़ने के बहाने महबूब विरोधी सक्रिय, महबूब की जगह चन्द्रपाल की उम्मीदवारी की सुगबुगाहट

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सपा का एक वर्ग यह भी मानता है कि जो लोग महबूब अली को मैदान से हटाने की जुगत भिड़ाने की कोशिश कर रहे हैं, वे अपने प्रयास में सफल नहीं होंगे.

राजनैतिक तर्कशास्त्रियों का मानना है कि आने वाला साल सपा मंत्री महबूब अली के लिए खुशखबरी वाला नहीं होना चाहता। हो सकता है विधानसभा चुनाव में यहां की उम्मीदवारी किसी ओर के खाते में चली जाये। जिस प्रकार जिला पंचायत अध्यक्ष की उनकी दावेदारी पर मोहर लगने के बावजूद उनसे छिन गयी थी, ठीक उसी तरह की चालें सपा में मौजूद कई ताकतवर नेताओं ने चलनी शुरु कर दी हैं।

जिस प्रकार मंत्री बनते ही महबूब अली ने पूरे जिला प्रशासन पर अपना कब्जा कर लिया था। अधिकारी दूसरे सपा नेताओं के बजाय महबूब अली को प्राथमिकता दे रहे थे उससे सपा के दूसरे नेताओं को इससे हीनभावना का शिकार होना पड़ रहा था। कई मामलों में उन्हें सपा के शीर्ष नेतृत्व तक जाना पड़ता था। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भी महबूब अली के विरोधी खेमे ने उनका पत्ता इसी आधार पर कटवाया था। कारण बताया गया था कि यदि किसी हिन्दू को यह पद दिया जायेगा तो यहां फैलाये जा रहे मुस्लिम तुष्टिकरण के बवाल को भी रोकने में सफलता मिलेगी।

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महबूब विरोधी इस बार भी चाहते हैं कि भाजपा की हिन्दू ध्रुवीकरण नीति को मात देने के लिए जिले की एक सीट किसी हिन्दू को दी जाये तो शेष सीटों पर भाजपा को थोक में जाने वाले हिन्दू मतों में सेंधमारी तो होगी ही साथ ही यह आरोप भी नहीं लगेगा कि सारी सीटें एक ही वर्ग को दी गयी हैं।

ऐसे में अमरोहा सीट ही फिर बैठती है। तुर्क समाज महबूब अली के खिलाफ पाशा मर्डर को लेकर बेहद उग्र है। उन्होंने महबूब अली के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है। ऐेसे में हाइकमान भी समझता है कि एक बड़ा वोट बैंक सपा से खिसकने के पीछे महबूब अली हैं। उधर चन्द्रपाल सिंह तथा महबूब विरोधी खेमा चाहता है कि सिंह को उम्मीदवार बनाया जाये तो बेहतर होगा। इसका लाभ सपा को जिले की चारों सीटों के जाट मतों को भाजपा की ओर जाने से रोक कर सपा की ओर मोड़ने का लाभ मिलेगा। भाजपा और बसपा को इससे कमजोर करने में सहायता मिलेगी।

महबूब अली भी जानते हैं कि इस चुनाव में उन्हें सफलता में संदेह है। हाइकमान उन्हें कोई दूसरा पद देने का आश्वासन देने की पेशकश में उनसे मैदान से हटने को कह सकता है।

सपा का एक वर्ग यह भी मानता है कि जो लोग महबूब अली को मैदान से हटाने की जुगत भिड़ाने की कोशिश कर रहे हैं। वे अपने प्रयास में सफल नहीं होंगे। महबूब अली राजनीति के कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं। वे जन समर्थन जुटाने के सभी दांवपेच जानते हैं। उनके पास केवल अल्पसंख्यक नहीं बल्कि बहुसंख्यक समुदाय का भी एक बड़ा जनसमर्थन है। वे तुर्क समाज में भी घुसपैठ रखते हैं तथा चुनाव से पूर्व इन लोगों की नाराजगी दूर करने में सफल हो जायेंगे।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.


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