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राजनीतिक दलों का कालाधन सफेद,कोई टैक्स भी नहीं

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राजनीति करने पर कोई टैक्स नहीं बल्कि मोटे भत्ते और सारी सुविधायें मुफ्त में हैं.


राजनीतिक दलों पर नोटबंदी लागू नहीं की गयी जबकि कालेधन का सबसे अधिक प्रयोग नेताओं द्वारा चुनावों में किया जाता है। बीस हजार से कम की चंदे में दी गयी रकम को इन नेताओं से कोई भी पूछने वाला नहीं।

मोदी सरकार की मौजूदा नोटबंदी में किसी भी दल का कुछ नहीं बिगड़ा। वित्तमंत्री अरुण जेटली तथा प्रवक्ता संबित पात्रा सहित भाजपा के बड़े नेता अब कह रहे हैं कि हमने राजनीतिक दलों के चंदे वाले कानून में कोई बदलाव नहीं किया।

प्रधानमंत्री मोदी सहित यह बताने वाला कोई नहीं कि राजनीतिक दलों को हजार या पांच सौ के नोट लेने की क्यों छूट दी गयी? वे कितना भी धन रख सकते हैं।

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जनता कपड़ों, जूतों, दवाईयों, पेट्रोलियम पदार्थों, बस और रेल टिकटों, सिनेमा टिकटों, खाना खाने पर, शौच करने पर, फोन पर बात करने पर, बिजली बिल देने पर, मकान में रहने पर, जमीन खरीदने पर, वाहन खरीदने पर, उसे सड़क पर चलाने पर, किनारे खड़ा करने के साथ ही हर चीज पर टैक्स देती है। बल्कि टैक्स पर भी टैक्स लगाया गया है।

टैक्स की मार से मरी जा रही जनता का पैसा इतने टैक्स चुकाने के बाद भी सरकार को कालाधन लग रहा है। उसे प्राप्त करने को बार-बार लाइनों में लगाया जा रहा है। जबकि राजनीति करने पर कोई टैक्स नहीं बल्कि मोटे भत्ते और सारी सुविधायें मुफ्त में ये नेता ही प्राप्त कर रहे हैं।

यदि मोदीजी देशभक्त और ईमानदार हैं तो उन्होंने राजनीतिक दलों के पैसे को क्यों छूट दी?

-टाइम्स न्यूज़ ब्यूरो.


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