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संकटमोचक के वंशज भयंकर संकट में

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राम भक्त और हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले उनकी दुर्दशा पर ध्यान दिये बिना उन्हें पत्थर और डंडे मारकर भगा देते हैं.

त्रेतायुग में जिस वानर जाति ने हनुमान के नेतृत्व में रावण के चंगुल से सीता को मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई, उसी वानर समुदाय के वंशज भुखमरी के शिकार हो पेट भरने को इधर-उधर भटकते फिर रहे हैं। राम भक्त और हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले उनकी दुर्दशा पर ध्यान दिये बिना उन्हें पत्थर और डंडे मारकर भगा देते हैं।

रात को कड़ाके की ठंड में वे ठंड से बचाव के ठिकाने तलाशते हुए मकानों की छतों पर, मुंडेरों में ठिठुरते देखे जा सकते हैं। भूख से व्याकुल होने पर राह चलते किसी महिला, बच्चे या पुरुष के हाथ से कोई खाद्य सामग्री हाथ लग जाती है तो उसी से गुजारा करने को मजबूर हैं।

शहर में कई बाग थे। लोगों के आंगन आदि में भी आम, अमरुद आदि के पेड़ थे। जो लगभग साफ हो चुके। ऐसे में उनको बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। कूड़े-कचरे के ढेरों में से गले सड़े सामान ढूंढ कर खाने को बंदर मजबूर हैं। इससे ये बीमार भी पड़ रहे हैं। तेजी से बढ़ रही इनकी आबादी से बंदरों और लोगों दोनों की ही समस्यायें बढ़ी हैं।

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गजरौला में बंदर कूड़े के ढेर पर खाना तलाश करते देखे जा सकते हैं.

भूख और सरदी से त्रस्त यह जानवर आक्रामक होता जा रहा है। यही कारण है कि मौका मिलते ही ये लोगों के कपड़े ले भागते हैं तथा घरों के आगे या आसपास खड़े पेड़ पौधों को मौका मिलते ही तहस-नहस कर डालते हैं।

शायद वे लोगों को संदेश देना चाहते हैं कि तुमने हमारे रहने के स्थान खत्म कर दिये। हमारे खाद्य स्थल फलों के बाग भी मिटा दिये। तुमने हमें बर्बाद किया है तो हम भी तुम्हें नहीं बख्शेंगे।

हम सभी को इस निरीह प्राणी के संकट और दिक्कतों को समझकर दूर करने का प्रयास करना चाहिए। यह पर्यावरण के लिए भी ठीक होगा। रामभक्तों को इसपर अधिक ध्यान देना होगा।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.


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