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भाजपा को लखनऊ पहुंचने से रोकने को सपा, कांग्रेस और रालोद गठजोड़ की तैयारी

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फार्मूले में कांग्रेस 78 तथा रालोद को 22 तथा शेष सीटों पर स्वयं लड़ने का सुझाव है.


पिछड़े और अल्पसंख्यक मतों के बिखराव को रोककर भाजपा को शिकस्त देने के लिए सपा, कांग्रेस और रालोद ने साझा मोर्चा तैयार कर लिया है जिसकी घोषणा किसी भी समय हो सकती है। तीनों दलों में सीटों की सहमति भी लगभग बन गयी है। तीनों अपना-अपना फार्मूला एक दूसरे के सामने रख उसपर सर्वसम्मत फैसला लेंगे।

सपा की ओर से फार्मूले में कांग्रेस 78 तथा रालोद को 22 तथा शेष सीटों पर स्वयं लड़ने का सुझाव है। जबकि कांग्रेस और रालोद भी अपनी-अपनी राय जल्दी देंगे।

समझा जाता है कि कांग्रेस सौ और रालोद पचास सीटों पर दावा पेश कर सकते हैं। ऐसे में सपा तीन सौ से नीचे रहेगी। यह न्यायसंगत भी होगा।

उत्तर प्रदेश विधानसभा 403 चयनित तथा एक नामित एंग्लो इंडियन सदस्य सहित कुल 404 सदस्यों वाली देश की सबसे बड़ी विधानसभा है।

इस समय सत्ताधारी सपा के पास 229, बसपा के पास 81, भाजपा 41, कांग्रेस 29 तथा रालोद 8 विधायकों के साथ विधानसभा में हैं।

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2014 के संसदीय चुनाव की मोदी लहर में इन सभी दलों का लगभग सफाया हो गया था। इस बार पंचायत चुनावों में सपा और बसपा में जबर्दस्त टक्कर रही जबकि भाजपा और कांग्रेस की स्थिति एक समान रही।

सपा, कांग्रेस और रालोद को फिर से यह खतरा लग रहा है कि भाजपा फिर से हिन्दू मतों के ध्रुवीकरण की कोशिश कर सकती है। उधर बसपा सपा के अल्पसंख्यक मतों में सेंधमारी के प्रयास में है। ऐसे में यदि सपा, कांग्रेस तथा रालोद अलग-अलग चुनाव लड़ते हैं तो अल्पसंख्यक मत तो कई जगह बंटेंगे ही बल्कि पिछड़े मतों में भी बिखराव होगा। यह भाजपा की मजबूती के स्पष्ट लक्ष्ण सपा और कांग्रेस को दिखाई दे रहे हैं।

इन तीनों दलों के एक साथ आने से जहां मुस्लिम मतदाता एकजुट होकर मोर्चे के साथ आयेंगे, वहीं नोटबंदी से आहत किसान और पिछड़ा वर्ग जिसमें यादव, जाट तथा अन्य पिछड़ी जातियों का एक बड़ा हिस्सा इस मोर्चे को समर्थन देगा।

अल्पसंख्यकों और पिछड़ी जातियों खासकर किसानों के बड़े वोट बैंक को भाजपा से छीनने में यह मोर्चा सफल होने की ओर बढ़ेगा।

इन तीनों दलों की एकजुटता से भाजपा और बसपा दोनों को ही झटका लगेगा। बसपा का अल्पसंख्यक एजेंडा तथा भाजपा के पिछड़े वर्ग के मतों का गणित इस मोर्चे से गड़बड़ाना तय है।

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यशपाल मलिक का जाट आरक्षण मुद्दा तथा हरियाणा में भाजपा सरकार द्वारा जाटों पर किये अत्याचार का चिट्ठा लेकर हरियाणा के जाट भाजपा विरोध का अभियान पहले ही शुरु कर चुके। इस तैयारी की गूंज ने सपा, कांग्रेस तथा रालोद गठबंधन को प्रेरणा प्रदान की है।

मोर्चे में सपा का मुख्यमंत्री, कांग्रेस का उप-मुख्यमंत्री और रालोद को मंत्रीमंडल में महत्वपूर्ण विभाग देने का खाका तैयार किया गया है। इस मोर्चे में कुछ छोटे दल भी शामिल किये जा सकते हैं। यह कवायद बिखरे मतों को एकजुट कर भाजपा के खिलाफ एक मजबूत मोर्चे का निर्माण करना है।

यह तो चुनावी बिगुल बजने पर बने चुनावी समीकरणों के बनने-बिगड़ने से पता चलेगा कि ऊंट किस करवट बैठेगा?

यदि यह मोर्चा मजबूती से खड़ा हो गया तो भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश खतरे की घंटी सिद्ध होगा।

-जी.एस. चाहल.


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