Header Ads

हरियाणा में फिर जाट आंदोलन : जेलों में बंद नवयुवकों की रिहाई बड़ा मुद्दा

हरियाणा-में-फिर-जाट-आंदोलन
यदि बात ही करनी है तो इस बार बात हरियाणा में होगी, चंडीगढ़ या दिल्ली में नहीं.


हरियाणा में पिछले साल जेलों में बंद किये हजारों जाट नवयुवकों की रिहाई, आंदोलन के दौरान मृत लोगों के परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी देने और आरक्षण की मांग को लेकर जाट आरक्षण आंदोलन फिर शुरु हो गया है। सरकार जाटों की मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं हुई। ऐसे में जाटों के सामने आंदोलन के सिवा कोई रास्ता नहीं। कहा जा रहा है कि सरकार बात करने को तैयार है। जबकि हकीकत यह है कि सरकार से आंदोलन से पहले और बाद में बात हुई लेकिन वह जाटों को झूठे आश्वासन देकर आपस में विभाजित करने का प्रयास करती रही है। जाट चाहते हैं कि यदि बात ही करनी है तो इस बार बात हरियाणा में होगी, चंडीगढ़ या दिल्ली में नहीं।

आंदोलन के मुखिया चौ. यशपाल सिंह मलिक के अनुसार 25 हजार जाट नवयुवक लगभग एक साल से जेलों में बंद हैं जिनपर अनापशनाप आरोप लगाये गये हैं। 135 युवकों पर देशद्रोह जैसे संगीन आरोप मंढ दिये गये हैं। हरियाणा की युवा पीढ़ी के भविष्य को बरबाद करने का प्रयास भाजपा सरकार कर रही है। इन सभी नवयुवकों को बिना शर्त रिहा करने का काम सरकार को अब तक कर देना चाहिए था। यदि ऐसा हो जाता तो जाटों और सरकार के बीच वार्ता की एक खिड़की खुलती लेकिन सरकार नहीं चाहती की सुलह का रास्ता खुले।

जाट आंदोलन शुरु होने से पूर्व ही हरियाणा के नौ जनपदों को सरकार ने अर्द्धसैनिक बलों की छावनियों में तब्दील कर दिया है। सात हजार होमगार्ड को भी तैयार कर दिया है। राज्य का पुलिस बल पहले ही सतर्क था तथा 55 कंपनियां फोर्स दूसरे राज्यों से मंगायी हैं। गांवों तक में फोर्स तैनात की जा रही है। यानि सरकार ताकत के सहारे जाट आंदोलन को कुचलने को तैयार है।

जाट-आरक्षण

यह सर्वविदित है केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद जिस राज्य में भी उसकी सरकार आयी है, ऐसे किसी भी राज्य में यदि किसी वर्ग ने अपनी मांगों के लिए आवाज उठायी तो उसे ताकत के बल पर दबाने का प्रयास किया गया है। आंदोलन प्रभावित क्षेत्र में समस्त सूचना तंत्र को ठप्प कर दिया है। वहां घटी छोटी-बड़ी घटनाओं की खबरों को बाहर जाने तक पर पाबंदी लगायी गयी। इंटरनेट प्रणाली तक ध्वस्त कर दी गयी।

गुजरात का पटेल आंदोलन हो या महाराष्ट्र का मराठवाड़ा आंदोलन सभी जगह यही लोकतंत्र विरोधी तरीके अपनाये गये। हरियाणा में भी इसकी शुरुआत की जा रही है।

सरकार के इन कदमों से आंदोलनों को समाप्त नहीं किया जा सकता, कुछ समय तक बाधित जरुर किया जा सकता है। इसके बाद यह समस्यायें और भी उग्र रुप धारण करती हैं। जिसका खामियाजा बेकसूर लोगों के साथ पूरे देश को भुगतना पड़ता है।

जाट आरक्षण का वादा लोकसभा चुनाव से पूर्व भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने जाटों से किया था। हरियाणा के विधानसभा चुनाव में भी यही वादा दोहराया गया जबकि बाद में इसे सरकार ने विवादित बना दिया। अदालत में सुनवायी के दौरान आरक्षण विरोधी वकीलों ने पंजाब-हरियाणा हाइकोर्ट के दोनों जजों की बेंच से जाट आरक्षण की सुनवाई यह कहकर हटवाने की मांग की कि दोनों जज जट सिख हैं। यह भावनात्मक मुद्दा है जिसमें फैसला प्रभावित हो सकता है।

इसी से पता चलता है कि ट्टसब का साथ सबका विकास’ के नारे के सहारे सत्ता में बनी भाजपा सरकार में न्यायपालिका को भी जातीय खांचे में ढालने का प्रयास हो रहा है। यह खतरनाक है। सारी स्थिति से जाट अच्छी तरह वाकिफ हो चुके हैं। हरियाणा में भाजपा जाटों को सत्ता के बल पर दबाने का जो कुचक्र चला रही है उसे जाट सफल नहीं होने देंगे। बल्कि दिल्ली और उसके चारों ओर बड़ी संख्या में बसे जाट एकजुट होकर उसका प्रतिकार करेंगे। इतिहास गवाह है कि यह बिरादरी किसी भी दमन या अन्याय को स्वीकार नहीं करती। सरकार उनकी जायज मांगों जिनमं जेलों में बंद युवाओं की रिहाई की मांग भी हैं, उसे सबसे पहले माने तो यह हरियाणा और देश दोनों के हित में होगा। दमनचक्र से जाट नहीं घबराने वाले।

जाट आरक्षण से सम्बंधित ख़बरें :

-जी.एस. चाहल.


Gajraula Times  के ताज़ा अपडेट के लिए हमारा फेसबुक  पेज लाइक करें या ट्विटर  पर फोलो करें. आप हमें गूगल प्लस  पर ज्वाइन कर सकते हैं ...