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रोगों की सौगात के बीच शिक्षण : औद्योगिक प्रदूषण के शिकार हजारों नौनिहाल

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लगातार प्रदूषित वातावरण में रहने के कारण फेफड़े और श्वासनांगों की बीमारियां बढ़ रही हैं.


नाईपुरा मोहल्ला में स्थित सभी स्कूलों के छात्र-छात्रायें औद्योगिक प्रदूषण के शिकार होकर अध्ययन समाप्त करने तक कई ऐसी बीमारियां अपने साथ ले जाते हैं, जो जीवन भर उनका पीछा नहीं छोड़तीं बल्कि अकाल मौत का खतरा बराबर बना रहता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक नेत्रों पर प्रदूषण का सीधा असर पड़ता है। यदि नाईपुरा के स्कूलों के बच्चों के नेत्र परीक्षण किये जायें, तो बच्चों दृष्टि दोष और नेत्र रोगों का प्रतिशत गजरौला से उत्तर दिशा के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों से बहुत अधिक पाया जायेगा।

औद्योगिक क्षेत्र से सटे सिद्धार्थ इंटर कालेज, सेंट सैफ इंटर कालेज, नोबल पब्लिक स्कूल, सेंट मैरी कान्वेंट स्कूल तथा एक परिषदीय स्कूल ऐसे स्थान पर स्थित हैं जहां औद्योगिक प्रदूषण का सबसे अधिक प्रभाव रहता है। हवा का रुख बंद या धीमा रहने पर भी इन स्कूलों में सबसे अधिक प्रदूषण रहता है। इसी के साथ यहां घटी किसी संभावित दुघर्टना के निशाने पर ये सभी स्कूल सबसे पहले होंगे।

स्थानीय चिकित्सकों का मानना है कि औद्योगिक प्रदूषण यहां नियंत्रण से बाहर है तथा नाईपुरा और उसका निकटवर्ती क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित है। यहां बसे लोगों को प्रदूषित वायु सूंघने की आदत पड़ चुकी जबकि नाईपुरा के पास नया आदमी गुजरता है तो उसे बेचैनी महसूस होती है। वर्ष भर पछुआ और पुरवा हवायें चलती हैं, उनमें भी सबसे अधिक पछुआ हवायें ही चलती हैं। ऐसे में इन स्कूलों की ओर सबसे अधिक प्रदूषण की मार रहती है।

यही कारण है कि उपरोक्त स्कूलों के बच्चों में बुखार, खांसी, रक्तचाप, चर्मरोग और उदासी के लक्षण सबसे अधिक पाये जाते हैं। इन बच्चों में चिड़चिड़ा तथा जिद्दीपन बढ़ता जा रहा है। लगातार प्रदूषित वातावरण में रहने के कारण फेफड़े और श्वासनांगों की बीमारियां बढ़ रही हैं।

इसी से रक्त संचालन और गुर्दों तक में इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। सिरदर्द और चकराने जैसी स्थिति भी बन सकती है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों तथा किशोरों में बीमारियों से लड़ने या रोग प्रतिरोधी ताकत अधिक होती है। ऐसे में प्रदूषण का दुष्प्रभाव सभी बच्चों में बाहरी तौर पर दिखाई नहीं देता लेकिन वर्षों तक उसके प्रभाव में रहने से वे गंभीर रोगों के शिकार हो सकते हैं। ये बीमारियां युवा अवस्था के ढलान पर अपना रंग दिखाना शुरु कर देती हैं। उस समय इनका विकराल रुप सामने आता है।

चिकित्सक बीएस जिंदल, डा. श्याम सिंह तथा डा. लाल सिंह का कहना है कि प्रदूषित वायु तथा प्रदूषित जल का सेवन स्वास्थ्य पर सबसे घातक प्रभाव डालता है। स्वास्थ्य के लिए शुद्ध वायु और शुद्ध जल अनिवार्य है। शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बच्चों को स्वच्छ वातावरण, स्वच्छ भोजन, स्वच्छ रहन-सहन बहुत जरुरी है।

उपरोक्त स्कूलों में हजारों बच्चे शिक्षारत हैं। उनके स्वस्थ और सुखद जीवन के लिए उनके अभिभावकों को गंभीरता से विचार करना चाहिए तथा प्रदूषित वातावरण में शिक्षण से बचाना चाहिए।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.


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