2019 के लिए बीजेपी की तैयारी शुरू हो गयी है, लेकिन पिछले वादे पूरा करना भी जरुरी है.
एक बार फिर गेंद भाजपा के पाले में
नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार पर हर किसी की निगाह टिकी है कि वे अपने वादों को पूरा करें.

उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड बहुमत से बनी भाजपा सरकार किसान, गांव और गरीब के मतों के बल पर सत्ता में आयी हैं। चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री तथा भाजपा के सबसे बड़े चुनाव प्रचारक नरेन्द्र मोदी ने इन वर्गों को लुभाने के बड़े-बड़े वादे किये थे। केन्द्र में सरकार बनने से पूर्व भी उन्होंने इसी तरह वादे कर बहुमत हासिल किया था। भले ही उसके बाद दिल्ली, बिहार तथा पंजाब में उन्हें जनता ने नकार दिया हो लेकिन उत्तर प्रदेश की जनता ने उनपर दूसरी बार भरोसा किया है अथवा इसे इस तरह भी कह सकते हैं कि 2014 से शुरु हुआ उत्तर प्रदेश में मोदी लहर का असर अभी तक कायम है। इस लहर की वजह कुछ भी हो लेकिन प्रदेश ने सिद्ध कर दिया है कि उन्हें दूसरे सभी दलों के नेताओं के बजाय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर ही भरोसा है। प्रधानमंत्री और दूसरे सभी लोग जानते हैं कि 2019 के लोकसभा चुनाव तक इस भरोसे को बनाये रखने के लिए जनता से किये वायदों को पूरा करना भी जरुरी होगा।

तीन साल पूर्व किये वायदों के पूरा न होने का ठीकरा उन्होंने सपा, बसपा और कांग्रेस पर यह कहकर फोड़ा कि सूबे में हमारी सरकार न होने से उनकी योजनायें जमीन पर नहीं आ पायीं। भले ही इसमें अधिकांश हकीकत से दूर हो लेकिन ज्यादातर लोगों ने इसपर भी भरोसा कर लिया।

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अरुण जेटली और वेंकैया नायडू बीजेपी
अरुण जेटली और वेंकैया नायडू (बीजेपी सरकार में मंत्री)

अभी भी दो साल का समय है। सूबे में उन सभी योजनाओं का बुरा हाल है जिनका सारा दायित्व केन्द्र सरकार पर होता है। मसलन रेलवे को ही लें, अनेक पैसेंजर ट्रेन बंद की गयी हैं। बैंकिंग व्यवस्था पिछले ढाई सालों में सबसे बदतर है। इन दोनों महकमों पर पूरा अधिकार केन्द्र का है तथा राज्य सरकारों का कोई अधिकार नहीं। उद्योगों और कृषि की हालत बद से बदतर है। किसानों का कर्ज माफ करने का वादा कर उनके वोट लिए गये। कहा गया कि कैबिनेट की पहली बैठक में ही उनका ऋण माफ करने का फैसला लिया जायेगा।

देखते हैं गांव, गरीब और किसान से दो बार किये वायदों को पूरा करने का काम शुरु होता है या नहीं? जनता ने दो बार भाजपा को मौका दिया है। यदि इस बार वह वायदों पर खरी उतरी तो उसे 2019 में भी मौका मिलेगा अन्यथा नहीं। गेंद सरकार के पाले में है।

-जी.एस. चाहल.


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