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मोदी के सामने वादे पूरा करने की चुनौती

दोनों जगह जीत के बाद अब यह बहाना भी नहीं चलेगा कि उनकी राज्य में सरकार नहीं.

ठीक होली के मौके पर देश के सबसे बड़े राज्य में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके समर्थकों का उत्साह बढ़ना स्वाभाविक है। यह कहने में कुछ भी गलत नहीं होगा कि उत्तर प्रदेश में 2014 की मोदी लहर अभी कायम है। यह भविष्य के गर्भ में है कि यह लहर 2019 के लोकसभा चुनाव तक कायम रहती है या नहीं। वैसे भाजपा को 2014 के चुनाव से इस बार तीन प्रतिशत मत कम मिले हैं।

भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव प्रचार में राज्य की समाजवादी सरकार और उसके साथ गठबंधन में शामिल कांग्रेस पर जमकर हमला बोला तथा अपनी योजनाओं को राज्य में लागू न करने का ठीकरा भी राज्य सरकार के सिर पर फोड़ा। सांसदों द्वारा गोद लिये किसी भी गांव में विकास न होने का दोषारोपण भी राज्य सरकार के सिर पर मंढ दिया। जबकि नेशनल हाइवे समेत किसी भी सड़क मार्ग पर केन्द्र ने कहीं भी काम नहीं कराया और रेलगाड़ियों को बंद कराना और आयेदिन होने वाली सड़क दुघर्टनाओं का कोई जिक्र नहीं हुआ। इनसे राज्य सरकार का कोई लेना-देना नहीं था।

अब तो वादे पूरे करने होंगे

बड़े हैरत की बात है कि अखिलेश अथवा राहुल में से कोई भी इस बारे में कुछ नहीं बोला, उन्हें इस हकीकत को जोरदार ढंग से जनता के सामने रखना चाहिए था। नोट बंदी को भाजपा के सभी प्रतिद्वंदी इस तरह उठा रहे, मानो उनके पास कालाधन था जिसे प्रधानमंत्री ने छीनकर देश के खाते में जमा करा दिया। यही तो भाजपा चाहती थी, विपक्ष जितना इसपर बोलता गया, उतना वही संदेह में फंसता गया।

मायावती तबतक मजबूत दिख रही थीं, जबतक वे दलित-मुस्लिम का जिक्र नहीं कर पायी थीं। इसके लिए नसीमुद्दीन सिद्दीकी को आगे करते ही उनके हिन्दू समर्थक उन्हें छोड़कर भागने शुरु हो गये। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्व तक कई सवर्ण और पिछड़े बल्कि दलित भी बसपा छोड़ भागे। मायावती, राहुल, अखिलेश तथा अजीत सिंह यह नहीं समझ पाये कि वे सभी 18 प्रतिशत अल्पसंख्यक मतों को पाने के प्रयास में शेष 81 प्रतिशत बहुसंख्यक मतों को नाराज कर रहे हैं। 2014 में भाजपा जिस ध्रुवीकरण का लाभ उठाकर 80 में से 71 एमपी प्राप्त करने में सफल हुई थी। ये सभी दल नासमझी में अल्पसंख्यकों को साथ करने के फेर में बहुसंख्यकों का ध्रुवीकरण भाजपा के बिना मांगे ही उसके पक्ष में करा गये। भाजपा जिस हथियार का इस्तेमाल करना चाहती थी। विपक्ष ने बिना मांगे ही उसको वह मुफ्त में मुहैया करा दिया।

अखिलेश यादव और राहुल गांधी की जोड़ी

उधर इतने विशाल बहुमत की उम्मीद भाजपा को भी नहीं थी। इसी लिए प्रधानमंत्री ने पूरी ताकत प्रचार में झोंक दी तथा घोषणा पत्र के अलावा भी किसानों का कर्ज माफ करने तथा पुराने पम्पिंग सैट बदलकर नये देने का एलान करना शुरु कर दिया। किसानों, गरीबों और गांव वालों की सभी दिक्कतें दूर करने के वायदे भाजपा नेताओं को करने पड़े। जनता ने प्रधानमंत्री को अब राज्य में भी अपार भरोसा कर बम्पर समर्थन दिया है। दोनों जगह भरपूर बहुमत की सरकार बन गयी है। इसलिए अब यह बहाना भी नहीं चलेगा कि उनकी राज्य में सरकार नहीं। यदि 2019 में भाजपा फिर से उत्तर प्रदेश का समर्थन चाहेगी तो उसे अभी से अपने वायदों को पूरा करना शुरु होगा। नयी सरकार बनते ही किसानों की फसलों पर ओलावृष्टि हुई है। उसपर जल्दी ही उचित मुआवजा और कर्ज माफी के लिए काम करना होगा।

-जी.एस. चाहल.


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