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नगर निकाय चुनाव : पिछड़ा वर्ग को मौका क्यों नहीं?

नगर निकाय चुनाव के मद्देनज़र गजरौला में भी सियासी गर्मी बढ़नी शुरू हो गयी है.

यहां भारतीय जनता पार्टी के हरपाल सिंह चेयरमैन हैं। वे पांचवे चेयरमैन हैं। ये सभी नगर पंचायत प्रमुख थे। अब गजरौला पालिका परिषद है इसलिए उसके लिए अध्यक्ष पद का पहला चुनाव होगा। हरपाल सिंह ने बंपर मतों से जीत हासिल कर पिछले सभी रिकार्ड ध्वस्त किये थे। वे एक बार फिर से यहां किस्मत आजमा सकते हैं।

नगर निकाय चुनाव : पिछड़ा वर्ग को मौका क्यों नहीं?
(1) चौ. वीरेंद्र सिंह (2) चौ. सोमवीर सिंह गुरूजी (3) चौ. सुरेन्द्र औलख (4) चौ. भूपेन्द्र सिंह (5) अशोक कश्यप.

पिछले पांच चुनावों में से गजरौला तीन बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो चुका और दो बार सामान्य सीट रहा। पिछड़ा और अन्य पिछड़ा वर्ग की सबसे अधिक आबादी होने के बावजूद इस नगर को इस वर्ग के लिए आरक्षित नहीं किया गया। जिसके कारण यहां अभी तक इस सबसे बड़े वर्ग का कोई भी व्यक्ति अध्यक्ष नहीं बन सका। इस वर्ग के लोग चाहते हैं कि उनके साथ न्याय किया जाना चाहिए तथा इस बार नगर को पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित किया जाये।

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इस तरह की इच्छा रखने वालों में भाजपा के अशोक कुमार कश्यप, सुरेन्द्र सिंह औलख, वेदपाल सिंह, सोमवीर सिंह(गुरुजी), रामवीर सिंह, वीरेन्द्र सिंह, भूपेन्द्र सिंह, डा. हनीफ सैफी, साबिर ठेकेदार और अनवार सैफी आदि अनेक नेता हैं। ये सभी पालिकाध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार भी हैं। इनका कहना है कि उनकी राय न्यायिक, मानवीय तथा सामाजिक सिद्धांतों के अनुकूल है। गजरौला के प्रथम आरक्षण में ही ऐसा होना चाहिए था। लेकिन इस बार भी यदि पिछड़े वर्ग को आरक्षण से वंचित किया गया तो यह वर्ग उसके न्यायिक और संवैधानिक अधिकार में भी पिछड़ा ही माना जायेगा।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.



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