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सभ्य समाज में पशु क्रूरता की हकीकत

पशु प्रेम की असलियत पर सिद्धार्थनाथ के बयान से संदेह की धुंधली परत जमती दिख रही है.

उत्तर प्रदेश में सत्तासीन नयी सरकार में मुख्यमंत्री का पदभार ग्रहण करते ही योगी आदित्यनाथ ने जैसे ही बूचड़खानों में जारी पशुवध के खिलाफ कदम उठाये तो मांस व्यापार से जुड़े लोगों और उनके समर्थकों में खलबली मच गयी। एक ओर योगी के इस कदम की जमकर सराहना शुरु हुई तो दूसरी ओर लोगों में विरोध के स्वर भी सुनाई दिये। कई जगह पशु बाजार तक बंद करा दिये गये। इसका उदाहरण अमरोहा जनपद के गजरौला और चुचैला कलां के पशु बाजार हैं।

सभ्य समाज में पशु क्रूरता की हकीकत
योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश) और मेनका गांधी (केन्द्रीय मंत्री).

भाजपा के संकल्प पत्र में अवैध तथा यांत्रिक बूचड़खानों को बंद कराने के वादे का जिक्र है। हाल ही में योगी मंत्रीमंडल के वरिष्ठ मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने एक बयान जारी कर कहा कि मांस व्यापारी डरे नहीं, केवल अवैध बूचड़खाने बंद किये जायेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि लाइसेंस प्राप्त बूचड़खाने चालू रहेंगे। यह भी सभी जानते हैं कि नगर निकायों में छोटे कमेले नगर पंचायत, पालिका परिषद या नगर निगमों से लाइसेंस लेकर चल रहे हैं। तो क्या ये सभी वैध हैं। या जो लाइसेंसशुदा नहीं हैं क्या निकाय बोर्ड उन्हें लाइसेंस जारी कर वैध नहीं कर देंगे? यांत्रिक बूचड़खानों को लखनऊ से मान्यता लेनी पड़ती है। इसी के साथ पर्यावरण प्रदूषण विभाग सहित कई अन्य विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने पर सरकार स्वीकृति प्रदान करती है। ऐसे में वे कानूनी तौर पर वैध बूचड़खाने हैं। तो क्या ऐसे बूचड़खाने चलते रहेंगे? इन बूचड़खानों में पशुवध की संख्या निर्धारित की जाती है लेकिन संबंधित अधिकारियों तथा सफेदपोशों की कृपा से यहां तय संख्या से कहीं अधिक पशुओं का वध किया जाता है। ऐसे में इन कानूनी, वैधता प्राप्त वधगृहों में अवैध कार्य जारी रहता है।

एक ओर मेनका गांधी का पशु क्रूरता विरोधी मिशन भी जारी है। यह संगठन पशु क्रूरता की अपनी अलग ही परिभाषा लेकर चलता है। पीएफए अजगर को अपने बाग में पालकर उसे वहीं, लोगों को दिखाने वाले व्यक्ति को पशु क्रूरता में जेल भिजवा देता है। जबकि दुधारु पशुओं जिनमें गाय, भैंस और बकरी जैसे मूक पशु आते हैं, उनके कत्लेआम पर खामोश रहता है या मामूली बयान तक सीमित हो जाता है। जबकि इस संगठन से जुड़े लोग अच्छी तरह जानते हैं कि ये हमें आजीवन अमृत तुल्य दूध प्रदान करते हैं। जिससे हम नाना प्रकार के पौष्टिक और स्वादिष्ट व्यंजन आदि तैयार कर उनका सेवन करते हैं। इसका बदला मानव समाज उन्हें कत्लगाहों में क्रूरतापूर्वक वध करने को भेजकर चुकाता है। इन बेकसूर मूक जीवों की हत्या तो सबसे बड़ी क्रूरता है। ऐसी क्रूरता का विरोध पशु प्रेमियों में प्राथमिकता पर होना चाहिए।

गौ सेवा और गौ प्रेम के नाम पर बहुत सी गौशालायें हैं। अनेक गौभक्त वहां जाकर भारी भरकम चंदा भी जमा करते हैं ताकि पुण्य मिले। इसमें गौ सेवा से आगे पुण्य प्राप्ति का लालच है। पशु तस्करों से बरामद पशु इन गौशालाओं में भेज दिये जाते हैं। आयेदिन इन गौशालाओं के पशुओं को बूचड़खानों में बेचे जाने की खबरें आती हैं। गायों को बचाने का ढोल पीटने वाले, पशु प्रेम का नाटक करने वाले और बूचड़खानों के मालिक की नीयत और अनीति में आज फर्क करना मुश्किल काम हो गया है।

वरिष्ठ मंत्री सिद्धार्थनाथ
भाजपा के वरिष्ठ मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह.
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भाजपा के पशु प्रेम की असलियत पर वरिष्ठ मंत्री सिद्धार्थनाथ के बयान से संदेह की धुंधली परत जमती दिख रही है। इससे तो यही लगता है कि योगी के प्रयास पर पानी फिरने जा रहा है और प्रदेश के अवैध मांस कारोबार को भी वैध करने की प्रक्रिया शुरु की जाने वाली है।

उधर रोजगार चला जाने का भी शोर मच रहा है। जबकि इसके अलावा भी तो लोग दूसरे रोजगारों से गुजर-बसर कर रहे हैं। सपा नेता मो. आजम खान का भी यह बयान महत्वपूर्ण है कि पूरे देश में मांस के कारोबार पर ही पाबंदी लगा दी जानी चाहिए। केवल गाय ही नहीं बल्कि दूसरे सभी जानवरों की हत्या रोकी जाये। दुख, दर्द और भय तो इन सभी को होता है। मूक पशुओं के बारे में हम सभी सभ्य लोगों को गंभीर होना होगा।

-जी.एस. चाहल.


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