इस बार उत्पादन गिरने के कई कारण हैं जिनकी मार से गेहूं बचने वाला नहीं है.

देश में खाद्यान्न की बंपर पैदावार के दावे करने वाली केन्द्र की भाजपा सरकार के मंत्री या तो खेती की हकीकत से अनभिज्ञ हैं या उन्हें झूठ बोलने की आदत पड़ गयी है। पंजाब और उत्तर प्रदेश के प्रमुख खाद्यान्न गेहूं के मुख्य उत्पादक राज्य हैं। इन्हीं के उत्पादन से पूरे देश की जनता का पेट भरने को अनाज उपलब्ध होता है।

इस बार गेहूं में सामान्य से कम दाने पड़ेंगे.

दिसंबर माह से ही प्रधानमंत्री और उनके सहयोगी मंत्री शोर मचा रहे थे कि गेहूं की बुवाई रिकार्ड क्षेत्र में हुई है। मानसून ठीक बरसा, ऐसे में रिकार्ड उत्पादन होगा। बाद में कई सरकारी विशेषज्ञ भी कहने लगे कि इस बार गेहूं की बंपर पैदावार होगी।

जो लोग खेती कर रहे हैं या गांवों में रहते हैं। वे जानते हैं कि नकदी संकट में समय से गन्ने के खेत खाली नहीं हुए जिसके कारण या तो गेहूं बोने में देर हुई या कम क्षेत्र में गेहूं बोया गया। ऐसे में गत वर्ष की तुलना में कम रकबे में गेहूं बोया गया है। अधिक रकबे में गेहूं बोने की बात सरासर झूठ है।

देर से गेहूं बोने से पौधे कमजोर रह गये। इसी के साथ मौसम की मार का दुष्प्रभाव पड़ने से दूसरी समस्या आयी। जनवरी और फरवरी बल्कि मध्य दिसंबर से ही गेहूं को अधिक ठंड की जरुरत पड़ती है। इस में मौसम विभाग से भी पूछने की जरुरत नहीं बल्कि आम आदमी भी जानता है कि इस बार ठंड के मौसम में तापमान सामान्य से काफी ज्यादा रहा, पता ही नहीं चला कि ठंड आयी भी या नहीं। इससे गेहूं की फसल पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसके कारण पौधे पूरी तरह तैयार नहीं हुए तथा उनमें कमजोर हालत में बालियां निकलीं, जिनमें सामान्य से कम दाने पड़ेंगे।

गजरौला की मंडी समिति की तस्वीर.

उधर फरवरी के अंतिम सप्ताह से ही मौसमी तापमान मार्च के समय जितना होने से मौसम शुष्क है तथा सूखी पछुआ हवाओं ने भी गति पकड़ ली। इससे दाने कमजोर पड़ जायेंगे। समय से पहले फसल पकने से उत्पादन में बेतहाशा गिरावट आयेगी। मौसम की मार से सिंचाई की फसल के गिरने तथा सिंचाई न करने से सूखने का खतरा रहता है। इस बार उत्पादन गिरने के कई कारण हैं जिनकी मार से गेहूं बचने वाला नहीं। ऐसे में गेहूं उत्पादन हर हाल में सामान्य से बहुत नीचे जायेगा। बंपर फसल के दावे करने वालों से हमारा कहना है कि बंपर अन्न उत्पादन के निराधार दावों को बंद कर समस्या के निदान की सोचें कि सरकारी तौल केन्द्रों पर इस बार गेहूं की खरीद का लक्ष्य कैसे पूरा होगा? किसान उधर झांकने भी नहीं जायेंगे।

-जी.एस. चाहल.


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