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24 घंटे में मुश्किल से दस घंटे ही बिजली मिल रही है

बिजली वाले सुनने को तैयार नहीं। कह रहे हैं -'आपूर्ति और मांग में अंतर बढ़ने से समस्या गहरायी है'

नगर में विद्युत व्यवस्था पटरी पर नहीं है। भीषण गर्मी में लोगों का बुरा हाल है। 24 घंटे में मुश्किल से दस घंटे ही बिजली मिल पा रही है। बिना किसी शेड्यूल के चल रही इतनी बिजली का भी यह पता नहीं कि वह कब आयेगी और आयेगी भी तो कितनी देर ठहरेगी? एक या दो घंटा लगातार आने के बाद घंटों तक बिजली गायब रहती है। लोगों के इन्वर्टर भी जबाव देने लगे हैं। गर्मी से परेशान लोग घरों, दुकानों और कार्यालयों में बैठे बिजली का इंतजार करते देखे जा सकते हैं।

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कई बार लो-वोल्टेज के कारण नयी समस्यायें खड़ी हो रही हैं। बिजली वाले कुछ भी सुनने को तैयार नहीं। उनका कहना है कि आपूर्ति और मांग में अंतर बढ़ने से समस्या गहरायी है। आगे से जैसी बिजली आयेगी, दी जायेगी। ऐसे में बिजली में सुधार न होने से लोगों में रोष पनपना शुरु हो गया है। बिजली के सहारे चलने वाले आटा चक्की, तेल स्पेलर आदि छोटे उद्योगों के सामने संकट उत्पन्न हो गया है। बिजली न आने से काम पूरा नहीं हो पा रहा। यदि जैनरेटर का सहारा लें तो महंगे डीजल से औसत नहीं पड़ता। आपत्तिकाल में उसका सहारा होता है लेकिन रोजना दस-बारह घंटे चलाना संभव नहीं।

लोगों को उम्मीद थी कि योगी सरकार अपने कथन के मुताबिक बिजली में सुधार करेगी तथा बिजली समस्या का समाधान हो जायेगा लेकिन सुधार के बजाय काम खराब होने लगा है तथा पहले जितनी भी बिजली नहीं मिल रही। अब मुख्यमंत्री के भी सुर बदल गये हैं। कहने लगे हैं कि जहां चोरी नहीं होगी, वहां 20 से 24 घंटे बिजली देंगे, बाकी को नहीं। चोरी रोकने का काम बिजली विभाग का है। वे चाहें तो बिजली चोरी रुक सकती है। चोरों के किये का दंड आम उपभोक्ता को देना कौन सा न्याय है? जब बिजली मूल्य के अलावा एक फिक्स चार्ज अतिरिक्त वसूला जा रहा है तो उपभोक्ता को आवश्यकतानुसार बिजली लेने का हक बनता है।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.


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