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पब्लिक स्कूलों की बेलगाम फीस से अभिभावक परेशान

विभागीय अफसरों की छत्रछाया में फलफूल रहा है शिक्षा में लूट का धंधा.

जिले में आलीशान बिल्डिंगों में अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की बाढ़ आ गयी है। बढ़ती आबादी और बढ़ते शिक्षा के महत्व के बहाने इन स्कूल संचालकों ने अभिभावकों की जेब पर डाका डालना शुरु कर दिया है। मनमानी प्रवेश शुल्क तथा ट्यूशन फीस के साथ कई तरह के शुल्क वसूलने का गोरखधंधा बेलगाम जारी है। इसके विपरीत यहां पढ़ाने वाले अध्यापक और अध्यापिकाओं का कहना है कि उन्हें सरकार द्वारा दैनिक मजदूरों को तय मजदूरी से भी कम वेतन दिया जा रहा है। सीधा बैंक में वेतन भेजने के नियम के बावजूद ऐसे रास्ते निकाल लिये हैं जिससे यह सिद्ध करना नामुमकिन है कि टीचर को कम वेतन मिल रहा है।

पब्लिक स्कूलों की बेलगाम फीस से अभिभावक परेशान

बेरोजगारी की मार झेल रहे पढ़े-लिखे नवयुवकों की लंबी होती लाइन का स्कूल संचालक पूरा लाभ उठा रहे हैं। वे सेवा देने से पूर्व ही उनपर अपनी शर्तें लाद देते हैं। यदि वह स्वीकार करता है तो उसे सेवा देते हैं अन्यथा मना कर देते हैं। मसलन कई संचालक अपने यहां पढ़ा रहे शिक्षकों के एटीएम कार्ड अपने पास रख लेते हैं तथा खाते में जमा की वेतन की रकम स्वयं निकालकर शिक्षक को उतने ही पैसे वापस देते हैं जितना वेतन तय होता है। वेतन में गड़बड़ी के कई कारण होते हैं जिन्हें बड़े ही गोपनीय और षड़यंत्रकारी ढंग से अंजाम दिया जाता है। कुछ स्कूलों में तो कई टीचर उस स्कूल में पढ़ रहे बच्चों की फीस के बराबर भी वेतन नहीं पा रहे।

कई संचालकों ने तो ऐसे स्कूलों के नाम में अंतर्राष्ट्रीय शब्द जोड़ दिया जहां आसपास के सौ-डेढ़ सौ बच्चे ही पढ़ रहे हैं। और टीचर भी एकदम स्थानीय तथा अप्रशिक्षित हैं। पूरे जिले में कई इंटरनेशनल नामकरण वाले स्कूल खुले हैं। सलेमपुर में इसी नामकरण का एक स्कूल खुला है। जिसकी बाउंड्री, कमरे, टीचर और न ही शिक्षा का स्तर अंतर्राष्ट्रीय तो क्या राष्ट्रीय भी नहीं कहा जा सकता। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ये स्कूल धड़ाधड़ खुल रहे हैं।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.


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