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गरीबों के डॉक्टर के नाम से जाने जाते थे डॉ. रमाशंकर अरुण

डॉ. रमाशंकर ने पूरा जीवन गरीबों तथा जरुरतमंदों को निशुल्क चिकित्सा में समर्पित कर दिया.

नगर के बहुत सम्मानित आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. रमाशंकर अरुण की सड़क दुर्घटना में दुखद मौत हो गयी। वे 90 वर्ष के थे। उन्होंने पूरा जीवन गरीबों तथा जरुरतमंदों को निशुल्क चिकित्सा में समर्पित कर दिया था। उनकी एकमात्र संतान उनकी बेटी गाजियाबाद के सरकारी चिकित्सालय में चिकित्साधिकारी हैं तथा पत्नि क्रांतिदेवी गर्ग बेटी डा. योगमाया के पास रहती हैं। जबकि रमाशंकर गजरौला में अपने चिकित्सालय में मरीजों का उपचार करते थे।

डॉ. रमाशंकर अरुण
डॉ. रमाशंकर अरुण का फाइल फोटो.

डॉ. रमाशंकर अरुण अपने छोटे भाई डॉ. निरंजन गर्ग तथा मित्र मुकंदराम के साथ अपनी पत्नि की कुशलता मालूम करने कार द्वारा गाजियाबाद जा रहे थे। गुरुवार दिन में सिंभावली के पास उनकी कार दुघर्टनाग्रस्त हो गयी। मुकंदराम की तो मौके पर ही मौत हो गयी। रमाशंकर अरुण और उनके भाई निरंजन गर्ग को गंभीर घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया। शुक्रवार को दिन छिपते ही रमाशंकर अरुण की सांसें भी थम गयीं। उनकी मौत का समाचार सुनकर गजरौला शहर तथा आसपास लोगों में दुख की लहर दौड़ गयी।

ईमानदारी और जनसेवा के लिए याद रहेंगे डॉ. अरुण
डॉ. रमाशंकर अरुण को एक बार गजरौला ग्राम सभा का प्रधान भी बना दिया गया। उन्होंने पूरी ईमानदारी से कार्यकाल पूरा किया तथा ग्राम सभा को नगर पंचायत बनवाने में सफल रहे। उनकी ईमानदारी, मृदु व्यवहार, कमजोरों के प्रति सेवाभाव को लोग हमेशा याद रखेंगे। वे विवादों से ही हमेशा दूर रहे। उनके घायल होने पर बहुत से लोग कह रहे थे कि डॉक्टर साहब तो कभी भी नहीं मरने चाहिएं। उनके निधन की खबर से ऐसे लोग बेहद दुखी हैं।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला


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