न तो इस बार उत्तर प्रदेश में गेहूं गत वर्ष से अधिक क्षेत्र में बोया गया और न ही उत्पादन अधिक निकला.

गेंहू खरीद का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा। यह हाल केवल अमरोहा का नहीं है, हर जिले का यही हाल सुनने को मिल रहा है। गेहूं किसानों के पास है नहीं। उन्होंने अपने खाने के लिए ही रखी है। असल बात यह है कि न तो इस बार उत्तर प्रदेश में गेहूं गत वर्ष से अधिक क्षेत्र में बोया गया और न ही उत्पादन अधिक निकला। सरकार और अफसर कोई भी दलील देते रहें सच्चाई यही है।

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अमरोहा जिले में 18,311 मेट्रिक टन गेहूं खरीदी गयी है। जबकि लक्ष्य था 77 हजार मेट्रिक टन। इस हिसाब से 23 फीसदी गेहूं खरीद हो पायी है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस काम के लिए सात एजेंसियां लगीं। गेहूं खरीद के लिए 59 क्रय केन्द्र भी बनाये गये थे। एक अप्रैल से 31 मई तक का समय दिया गया था। मगर लक्ष्य तो हासिल हुआ नहीं। अब इसकी मियाद 15 जून तक कर दी गयी है।

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लेकिन सवाल वही खड़ा हो रहा है कि जब दो महीने में 23 प्रतिशत गेहूं खरीद हुई तो 15 दिनों में बाकी गेहूं क्या आसमान से उतर आयेगा?

उधर जिला कृषि अधिकारी चरन सिंह कह रहे हैं कि किसानों को क्रय केन्द्रों तक गेहूं लाने को जागरुक किया जा रहा है।

गजरौला टाइम्स ने पहले ही गेहूं के घटे उत्पादन पर लिख दिया था, क्लिक कर पढ़ें :
सरकारी क्रय केन्द्र तरसेंगे गेहूं को

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.


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