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पीएफ न मिलने से उमंग डेयरी के श्रमिकों में रोष, प्रबंधन द्वारा सेवामुक्त की धमकी से विवाद गहराया

प्रबंधतंत्र की हठधर्मिता के चलते श्रमिक आर्थिक तंगी के शिकार जैसे-तैसे गुजर करने को मजबूर हैं.

श्रमिकों को पीएफ न दिये जाने से श्रमिकों और जे.के. ग्रुप की उमंग डेयरी नामक दुग्ध फैक्ट्री के प्रबंधन का विवाद नहीं सुलझ सका। दोनों पक्षों को थाने में बुलाकर थानाध्यक्ष ने फैसले की कोशिश की लेकिन कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान समर्थकों की मजदूर विरोधी नीति से मामला और उलझा दिया जिससे पुलिस ने चेतावनी के बाद दोनों पक्षों को थाने के बाहर कर दिया था।

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कई दिनों से युवा भाजपा नेता दीपक भड़ाना के नेतृत्व में उमंग डेयरी के श्रमिक पीएफ की मांग को लेकर आंदोलित हैं। प्रबंधतंत्र की हठधर्मिता के चलते श्रमिक आर्थिक तंगी के शिकार जैसे-तैसे गुजर करने को मजबूर हैं। वे पीएफ की जायज मांग कर रहे हैं लेकिन प्रबंधन उसे मानने को तैयार नहीं बल्कि उन्हें छंटनी के नाम पर सेवामुक्त करने की धमकी दे रहा है।

वार्ता के बहाने प्रबंधन उन्हें थाने में ले आया। जिसमें कंपनी के एमडी तथा दो अन्य प्रबंधक मौजूद थे। दोनों पक्षों की ओर से अपने तर्क रखे गये। श्रमिकों की ओर से दीपक भड़ाना, देवेन्द्र विधूड़ी सहित कई श्रमिक नेता अपनी बात रख रहे थे। इसी दौरान राज्य सरकार के मंत्री चेतन चौहान के कई समर्थक उमंग डेयरी के पक्ष में आ गये। इससे श्रमिक नेताओं में रोष स्वाभाविक था। थानाध्यक्ष की मौजूदगी में भाजपा कार्यकर्ता आपस में उलझ पड़े। संभवतः डेयरी प्रबंधन यही चाहता था। पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने से बाहर खदेड़ दिया। श्रमिक और प्रबंधन विवाद शांत होने के बजाय बढ़ गया।

श्रमिक और उनके समर्थक डीएम के पास न्याय पाने के लिए अमरोहा जाने की बात कह रहे थे तथा बाद में वे वहां गये थे। निकाय चुनाव में व्यस्त जिला प्रशासन इस समस्या पर अभी कुछ नहीं कर पायेगा।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.


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