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किसान नेताओं की चौधराहट ने तोड़ दी किसान एकता की टांग

सरकारें आज किसानों की दिक्कतों को संजीदा नहीं. इसकी कमर तोड़ने के नए तरीके ईजाद किये जा रहे हैं.

किसानों की भलाई से अधिक अपनी चौधराहट कायम रखने के चक्कर में चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत द्वारा खड़े किये विशाल संगठन को उनकी मौत के बाद खंड-खंड कर कमजोर करने में तथाकथित किसान नेता पूरी तरह उत्तरदायी हैं। टिकैत के दोनों बेटे भी इन नेताओं से किसी भी तरह पीछे नहीं हैं। यही कारण है कि कोई भी सरकार आज किसानों की दिक्कतों को लेकर संजीदा नहीं बल्कि इस वर्ग की कमर तोड़ने के आयेदिन नये-नये ढंग ईजाद किये जा रहे हैं।

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चौ. चरण सिंह तथा चौ. टिकैत जैसे नेताओं के आहवान से जब भी प्रदेश या देश में जहां भी किसान आंदोलन हुए हैं, उन सभी आंदोलनों में हमेशा तत्कालीन अविभाजित मुरादाबाद जिले (जिसमें आज अमरोहा और संभल जनपद भी बनाये गये हैं) थे किसानों का सबसे अधिक योगदान रहा है। टिकैत के आंदोलन के दौरान रजबपुर (अमरोहा) में किसानों और पुलिस में जो संघर्ष हुआ, वह एक इतिहास बन गया। इसमें कई किसान शहीद हो गये। फिर भी वे पीछे नहीं हटे थे। प्रशासन को घुटनों के बल कर देने वाली यह घटना हमेशा याद रहेगी।

आज यहां भाकियू के ही कई गुट खड़े हो गये हैं। ये गुट महेन्द्र सिंह टिकैत के बेटों की हठधर्मिता तथा संगठन में भेदभाव और कई किसान नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण अस्तित्व में आ गये हैं।

चौ. विजयपाल सिंह भाकियू, दिवाकर सिंह भाकियू (भानु) तथा हरपाल सिंह भाकियू असली के ठेकेदार हैं। सत्ता से लड़ने के बजाय ये एक दूसरे से कूटनीतिक लड़ाई में समय और ताकत खर्च कर रहे हैं।

उधर उपेन्द्र सिंह जैसे कई युवक अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने के लिए किसान नेता स. वीएम सिंह के कंधे पर सवार हो गये हैं।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.


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