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योगी की औद्योगीकरण विस्तार नीति के लिए गजरौला मुफीद

यदि मुख्यमंत्री इस सुझाव को गंभीरता से लेकर आगे बढ़ें तो इससे सूबे में बढ़ रही बेरोजगारी दूर होगी.

उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन के लिए मुख्यमंत्री औद्योगीकरण की कोशिश कर रहे हैं। वे इसके लिए उद्यमियों को यहां स्थापित करने के लिए निवेश का आग्रह कर रहे हैं। साथ ही उन्हें हर तरह की सहायता के साथ ही कानून व्यवस्था मजबूत करने का संकल्प भी दोहरा रहे हैं। यूपीकोका जैसा कानून लाकर उन्होंने इसके लिए स्पष्ट संदेश दिया है कि सूबे को अपराध मुक्त बनाना चाहते हैं। वास्तव में यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस कार्य में सफल हुए तो सूबे में बढ़ रही बेरोजगारों की लाइन निश्चित रुप से कम होगी।

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नये उद्योग लगाने के लिए सुविधा मुहैया कराना अच्छी बात है तथा यह सरकार का दायित्व भी है लेकिन इसके लिए योगी जी यदि पहले ही नियत औद्योगिक क्षेत्रों पर थोड़ा ध्यान दें तो ज्यादा बेहतर और आसन होगा। इसके लिए पहले उन वजहों को समझना होगा कि ऐसे क्षेत्रों में उद्योग स्थापना का क्रम क्यों थमा तथा चालू उद्योग क्यों बंद हुए?

गजरौला एक बड़े औद्योगिक क्षेत्र के नाम पर चयनित किया गया। यहां ढाई दशक पूर्व कई बड़ी कंपनियों ने उद्योग लगाने शुरु किये। जिनमें से बड़े बजट की जुबिलेंट लाइफ साइंसेज लि., इंश्लिको लि. तथा टेवा एपीआई जैसी इकाईयां आज भी मौजूद हैं। इनके बाद लगी लगभग दर्जन भर कई अन्य इकाईयां भी हैं। जिनमें कई हजार लोग काम करते हैं।

इस सबके बावजूद यहां की दर्जन भर इकाईयां बंद हो गयीं जिनमें श्री एसिड्स एण्ड कैमी. लि., बैस्ट बोर्ड लि., रतन वनस्पति, चड्ढा रबर्स, एस.एस. ड्रग्स, सिद्धार्थ स्पिन फैब आदि के नाम शामिल हैं।

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कई सौ एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि इन बंद इकाईयों के कारण कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो गयी जबकि उससे अधिक कृषि भूमि उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास निगम द्वारा अधिग्रहीत करने के बाद भी खाली पड़ी है।

इस भूमि पर ढाई दशक बीतने पर भी कोई उद्योग नहीं लग पाया। मुख्यमंत्री को चाहिए कि पहले तो वे बंद पड़े उद्योगों की भूमि पर नये उद्योग लगवायें। इसके बाद जो अधिग्रहीत भूमि खाली है उसपर भी उद्योग स्थापित करायें।

गजरौला में उद्योगों के लिए भूमि, भूजल, बिजली तथा रेल और विस्तृत सड़क मार्गों के साथ कई उद्योगों के लिए कच्चा माल भी उपलब्ध है। इतनी सारी मूलभूत जरुरतें सूबे के किसी अन्य स्थान पर मिलना मुश्किल होंगी।

यदि मुख्यमंत्री इस सुझाव को गंभीरता से लेकर आगे बढ़ें तो इससे जहां सूबे में बढ़ रही बेरोजगारी दूर होगी, वहीं सरकार के राजस्व में जादुई बढ़ोतरी भी होगी।

क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि आगे आयें


गजरौला के औद्योगिक विस्तार को गति देने के लिए खेल व युवा कल्याण मंत्री चेतन चौहान, पूर्व सांसद देवेन्द्र नागपाल, सांसद कंवर सिंह तंवर, धनौरा विधायक राजीव तरारा, विधायक महेन्द्र सिंह खड़गवंशी आदि को एकजुट होकर मुख्यमंत्री को यहां की यथास्थिति से अगवत कराना चाहिए। ये लोग चाहेंगे तो मुख्यमंत्री को यहां औद्योगीकरण बढ़ाने के लिए तैयार कर सकते हैं।

विधायक राजीव तरारा तथा देवेन्द्र नागपाल इसमें पहल कर सकते हैं। फूड प्रोसेसिंग इकाईयां लगें तो यहां के किसानों को उससे बेहतर रोजगार और आशातीत आर्थिक लाभ होगा।

-जी.एस. चाहल.


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