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पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे है गढ़-गजरौला का गंगा तटीय क्षेत्र

ब्रजघाट, गढ़मुक्तेश्वर तथा तिगरी लगभग 12 किलोमीटर दूरी तक गंगा के दोनों तटों पर बसे तीन तीर्थ स्थल हैं.

गढ़ गजरौला और तिगरी का गंगा तटवर्ती त्रिभुजाकार क्षेत्र एक बेहतर पर्यटन स्थल की तमाम शर्तें पूरी करने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों की अनदेखी का शिकार होकर आंसू बहाने को मजबूर है। राष्ट्रीय राजधानी के प्रवेश पर स्थित ब्रजघाट जैसे लघु हरिद्वार को लंबे समय से अपने विकास की दरकार है। बार-बार सरकारी घोषणाएं होती रही जबकि पिछले वर्ष 30 हजार करोड़ का बजट घोषित कर ब्रजघाट से गढ़ होते हुए तिगरी तक गंगा तटवर्ती क्षेत्र के सौंदर्यीकरण का शोर मचाया गया। लेकिन धरातल पर कुछ भी नजर नहीं आता। यहां प्रभाहित हो रही पतित पावनी गंगा का प्रवाह भी इसी कारण धीमा पड़ता लगता है।

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ब्रजघाट, गढ़मुक्तेश्वर तथा तिगरी लगभग 12 किलोमीटर दूरी तक गंगा के दोनों तटों पर बसे तीन तीर्थ स्थल हैं। यहां प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर लघु कुंभ की तरह लाखों श्रद्धालु स्नान तथा अन्य धार्मिक कर्मकांडों के लिए आते हैं। कई किलोमीटर तक डेरे और तंबुओं का अस्थाई नगर बस जाता है। जिस की व्यवस्था दशकों से जिला पंचायत तथा विगत वर्ष से यह राज्य सरकार द्वारा की जानी शुरू हुई है। इस आयोजन में देश के उत्तरी राज्यों के श्रद्धालु हफ्ता भर ठहर कर गंगा स्नान और दूसरे अनुष्ठान संपन्न कराते हैं। अधिकांश लोग सपरिवार यहां डेरा डालकर गंगा के प्रति अगाध श्रद्धा का प्रमाण देते हैं।

केवल श्रद्धालु ही नहीं बल्कि हमारे देश के सभी धर्मों और संप्रदायों के लोग इस आयोजन का लाभ उठाते हैं। यह आस्था, पिकनिक और कारोबार का मिलाजुला महासमायोजन है। यहां दुकानें लगाने वालों में हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदायों के लोग होते हैं। मेले और स्नान का आनंद लेने वाले भी सभी वर्गों के लोग होते हैं।

प्रति माह की पूर्णिमा तथा अमावस्या सहित सभी पर्वों पर लगते हैं स्नान मेले :
निजी वाहनों के साथ ही यहां सभी ओर से रेल और सड़क मार्गों की बेहतर व्यवस्था है। दिल्ली और लखनऊ को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे तो यहां से गुजरता है। साथ ही गढ़, ब्रजघाट पर जहां रेलवे स्टेशन है वहीं गजरौला में रेलवे जंक्शन है। साथ ही आगरा से देहरादून को जोड़ने वाला प्रांतीय राजमार्ग भी इसी क्षेत्र के नेशनल हाईवे को क्रॉस करते हुए गुजरता है।

शिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए कांवड़ लेने वाले भी आते हैं :
महाशिवरात्रि पर वर्ष में दो बार यहां भी हरिद्वार की तरह कांवड़ भरने वाले श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। जो हर साल बढ़ती जा रही है। इससे यहां लोगों को रोजगार मिला है। कांवड़ निर्माण में बहुत से मुस्लिम भाई भी संलग्न हैं। गंगा यहां लोक-परलोक की तारणहार के साथ लोगों की रोजी-रोटी का भी बड़ा साधन है। विकास हो तो यह व्यवसाय और भी बढ़ेगा।

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ब्रजघाट पर हरिद्वार के नजारे :
ब्रजघाट नेशनल हाइवे पर दिल्ली से 100 किलोमीटर उत्तर में दिल्ली लखनऊ नेशनल हाईवे पर है जहां होकर गंगा नदी बहती है यहां एक दशक पूर्व प्रदेश सरकार ने हरिद्वार की हर की पैड़ी की तर्ज पर एक घंटा-घर बनाकर गंगा किनारे कुछ सौंदर्यीयकरण भी कराया। साथ ही गंगा आरती की शानदार परंपरा एक स्थानीय कमेटी द्वारा शुरू की गई। सायं कालीन यह आरती घंटा-घर के निकट सुरसरि तट पर एक आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण करती है जिससे कल-कल बह रही पवित्र भागीरथी उसमें अमृतरस बोल कर एक अद्भुत आनंद की अनुभूति का आभास कराती है। यहां गंगा तट पर लोगों को बैठकर गंगा दर्शन के लिए कई बैंचों को भी बनाया गया है।

ब्रजघाट से गजरौला मात्र 10 किलोमीटर दूर है। इस बीच गंगा से गजरौला तक के समानांतर तीन सहायक नदियां छोईया, मतवाली और बगद भी मृतप्राय सी बहती हैं। यह इस तरह चार नदियों का क्षेत्र है। ब्रजघाट से पश्चिम में गंगा के दूसरे तट पर 10 किलोमीटर दूर ही तिगरी एक पवित्र धार्मिक स्थल है जो गढ़मुक्तेश्वर के दूसरी ओर गंगा पार है। यानि गंगा के दोनों तटों पर गढ़ व तिगरी आमने-सामने स्थित हैं। तिगरी से पांच किलोमीटर दूर काली ढाब नामक एक ऐतिहासिक झील है। जहां प्रतिवर्ष सारस की शक्ल और आकार के साइबेरियन पक्षी आते हैं। यह जनवरी में आते हैं और गर्मी आते ही अपने देश लौट जाते हैं।

इस पूरे क्षेत्र का विकास कर राज्य और केंद्र सरकारों को एक विशाल धार्मिक पर्यटन स्थल का रूप देने का काम करना चाहिए। इसमें बहुत बड़े खर्च की जरूरत नहीं। इस स्थल के विकास से सरकार को राजस्व के अतिरिक्त आय होगी। पर्यटन स्थल का रूप लेते ही यहां होटल आदि के कारोबारी आने शुरू हो जाएंगे। भूमि के क्रय विक्रय से ही सरकार को भारी राजस्व मिलेगा। बाद में कारोबारियों से उसकी आय बढ़ेगी। इसी के साथ स्थानीय लोगों को भी काम मिलेगा और धार्मिक लोगों को भी यहां सब कुछ मिलेगा।

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धनौरा विधायक पूरा प्रयास कर रहे हैं. 
तंवर, चेतन, महेंद्र तथा कमल भी कोशिश करें तो बन सकता है काम...

क्षेत्रीय विधायक राजीव तरारा ने विधायक बनते ही इस दिशा में सराहनीय प्रयास शुरू किए जो यहां अभी तक जारी हैं। उनका कहना है कि वह अपनी बात मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्रालय तक पहुंचा रहे हैं। क्षेत्र के लोगों की आशाएं तथा देश और प्रदेश की जनता के हित के इस कार्य के लिए वह अपनी पूरी शक्ति लगाएंगे। तथा इस कार्य को संपूर्ण कराने में कोई कमी बाकी नहीं छोड़ेंगे।

लोगों का कहना है कि कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान का यह कार्य क्षेत्र है। उन्हें इस ओर ध्यान देना चाहिए। वह इसमें रुचि लेंगे तो यह कार्य आसान हो जाएगा।

भाजपा सांसद कंवर सिंह तंवर को चार साल हो गए लेकिन वे इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे। उन्हें केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय का द्वार खटखटाना चाहिए। इसी तरह गढ़ से भाजपा विधायक कमल सिंह को भी धनौरा भाजपा विधायक राजीव तरारा की तर्ज पर राज्य सरकार का ध्यान इस ओर दिलाना चाहिए। हसनपुर भाजपा विधायक भी इसी क्षेत्र से हैं। उन्हें भी ध्यान दिलाना चाहिए। यदि गंगा तटवर्ती क्षेत्र के तीनों विधायक, एक मंत्री और सांसद मिलकर कोशिश करें तो गंगा और उसके निकट का उपेक्षित क्षेत्र देश का एक बहुत ही सुंदर और धार्मिक पर्यटन स्थल बन सकता है।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला/ब्रजघाट.


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