यहां चारों और कूड़े कचरे के ढेर हैं जिससे लोगों को यहां ट्रचिंग ग्राउंड होने का भ्रम उत्पन होता है.

नगर की स्वच्छता का आकलन करने आई टीम भले ही पालिका परिषद कार्यालय के दस्तावेज देखकर गली-मोहल्लों और सड़कों पर घूम कर स्वच्छता का आकलन कर रही हो लेकिन टीम का एक भी सदस्य फाजलपुर बिजली घर में जो नगर के बीचों-बीच लगभग 12 बीघा भूमि पर बना है, में नहीं पहुंची।

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इसका अधिकतर क्षेत्र बिल्कुल खाली है। यहां बिजली दफ्तर, कॉलोनी और नियंत्रण कक्ष मात्र एक तिहाई भूमि पर बने हैं। बीच का शेष भाग खाली पड़ा है जहां गंदगी का साम्राज्य है। यहां चारों और कूड़े कचरे के ढेर हैं जिससे लोगों को यहां ट्रचिंग ग्राउंड होने का भ्रम उत्पन होता है।

निकटवर्ती आबादी के कई लोगों ने यहां अपने घरों का तमाम कूड़ा कचरा डालकर समस्या और बढ़ा दी है। आवारा सूअर और कुत्ते भी यहां गंदगी पर मंडराते रहते हैं। इससे यहां आने वाले उपभोक्ताओं को गंदगी की बदबू से दो-चार होना पड़ता है। बिजली विभाग का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी इस ओर ध्यान नहीं देता। जब अधिशासी अभियंता गुलशन गोयल से इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने इसे पालिका परिषद पर डाल दिया बोले, यह काम नगर पालिका का है, इओ से कहो। यहां कंट्रोल रूम के साथ लगे शौचालय की हालत भी बद से बदतर है।

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विद्युत परिसर में झाड़ियों में आसपास के लोग भी शोच कर भागते हैं। खुले में पेशाब बिजलीघर में आम बात है। समय पूर्व चाहरदीवारी का उखड़ा प्लास्टर इसका साक्षात परिणाम है।

एसडीओ तथा कई बिजली कार्यालय यहां होने के कारण कर्मचारी और उपभोक्ता भारी संख्या में मौजूद रहते हैं। लेकिन यहां पर्याप्त शौचालय नहीं हैं। इससे यहां उगे घास में ही लोग निपटने को बाध्य होते हैं।

पालिका के वरिष्ठ लिपिक आदेश कुमार का कहना है कि परिसर के अंदर का कूड़ा बिजली वालों को दूसरे लोगों की तरह गेट पर प्रतिदिन आवाज लगाने वाली कूड़ा गाड़ी में डालना चाहिए। यदि उन्होंने गंदगी फैलाने का काम किया तो नोटिस जारी होगा।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.


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