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डॉ. जिंदल ने अनूठी अनुग्रह यात्रा में शामिल होने का आह्वान किया

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए डॉ.जिंदल ने बताया कि इसकी शुरुआत 26 फरवरी को काशी में होगी.

सेवा भाव से प्रेरित होकर आर्ट ऑफ लिविंग परिवार अपनी दूसरी रेल यात्रा के लिए तैयार हैं। सामाजिक सौहार्द व प्रेम बढाने के उद्देश्य से “ओम अनुग्रह” नामक यह यात्रा पूर्वी उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट में पड़ने वाले विभिन्न कस्बों से होकर निकलेगी। आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी धर्म नगरी काशी से इस अनूठी यात्रा की शुरूआत करेंगे। यह जानकारी आर्ट ऑफ लिविंग, धनौरा के निर्देशक डॉ.बी.एस.जिंदल ने दी।

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उन्होंने बताया कि अनुग्रह का अर्थ है-आशीर्वाद। इस यात्रा का उद्देश्य गुरुदेव की दैवीय उपस्थिति के द्वारा लोगों के जीवन को छूना है। इसके अलावा गुरुदेव के प्रेम, शांति और सौहार्द्र के वैश्विक संदेश के साथ-साथ उनके दिव्य ज्ञान और आध्यात्मिकता को भारत के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश के लोगों के बीच फैलाना है। डॉ. जिंदल ने क्षेत्र की जनता का आह्वान किया कि इस ऐतिहासिक यात्रा में बढ़-चढ़ कर भाग लें।

रेल यात्रा के संबंध में लखनऊ में आयोजित वार्ता कर लौटे जिंदल हॉस्पिटल के चिकित्साधिकारी डॉ. दिलबाग जिंदल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में इस यात्रा के दौरान श्री श्री ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों से मिलेंगे और अपनी उपस्थिति के बीच सत्संग में उन्हें जीवन जीने के प्रयोगात्मक सूत्र और आशीर्वाद प्रदान करेंगे। इस अनूठी रेल यात्रा के दौरान देश-विदेशों से आये 1500 से अधिक श्रद्धालु गुरुदेव के साथ रहेंगे। इससे आध्यात्मिकता के साथ-साथ आर्ट ऑफ लिविंग के सेवा कार्यक्रमों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। अनुग्रह यात्रा का कार्यक्रम तय होने के साथ इसके लिए पंजीकरण प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

यात्रा के कार्यक्रम की जानकारी देते हुए डॉ.जिंदल ने बताया कि इसकी शुरुआत 26 फरवरी को काशी में होगी। दुनिया के सबसे प्राचीन और पवित्र शहर वाराणसी में गुरुदेव का महासत्संग होने से पहले यात्रियों को सारनाथ में भ्रमण पर ले जाया जाएगा। सारनाथ में ही ईसा से 528 साल पूर्व बौद्ध धर्म की शुरुआत हुई थी।

यात्रा पर रवाना होने के पूर्व श्री श्री रविशंकर काशी में संत समागम करेंगे। इसमें सभी धर्मों के संत-महंत शामिल होंगे। भारतीय रेलवे के सहयोग से विशेष रूप से तैयार की गयी “श्री श्री स्पेशल एक्सप्रेस” नामक रेलगाड़ी 27 फरवरी को वाराणसी से चलेगी। शाम को यात्रा गोरखपुर पहुंचेगी व शहर में भ्रमण के बाद यहां पर भी गुरुदेव का महासत्संग आयोजित किया जाएगा।

28 फरवरी को इस यात्रा के आखिरी पड़ाव के दौरान यात्री श्रावस्ती का दौरा करेंगे। यह बौद्धशहर है, जहां पर गौतम बुद्ध ने करीब 24 साल बिताए थे। यह यात्रा लखनऊ में जाकर संपन्न होगी।

28 फरवरी की शाम को स्मृति उपवन, लखनऊ के विशाल मैदान में नागरिकों की एक विशाल संकल्प सभा के रूप में महासत्संग आयोजित किया जाएगा। इसमें दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण ह्त्या सरीखी कुरीतियों को जड़ से मिटाने के लिये संकल्प लिया जायेगा।

इस संकल्प सभा के आयोजन को सफल बनाने के लिए अनेकों सरकारी, गैर सरकारी संगठनों व सामाजिक संस्थाओं ने सहयोग प्रदान करने की घोषणा की है। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के अलावा लायंस क्लब, रोटरी क्लब, ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश पुलिस आदि शामिल हैं। डॉ.जिंदल ने बताया कि इस महोत्सव में भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।

-टाइम्स न्यूज़ धनौरा.


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