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मौसमी बेरुखी की मार गेहूं पर

कम रखना और औसत से कम उत्पादन के कारण सरकारी क्रय केन्द्रों पर इस बार गेहूं गत वर्ष से भी कम पहुंचेगी.

समय पूर्व मौसम गरमाने और देर से हुई गेहूं की बुवाई के कारण इस बार गेहूं की पैदावार सामान्य से कम होगी। यह जानकारी अनुभवी किसानों के साथ कृषि वैज्ञानिकों ने दी है।

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किसानों का कहना है कि इस बार गेहूं प्रति बीघा डेढ़ से दो कुन्तल ही निकल सकता है.

उल्लेखनीय है कि चीनी मिलों से पर्याप्त पर्चियां न मिलने के कारण गन्ने के खेत समय से खाली नहीं हो सके। यहां साठ फीसदी गेहूं गन्ना काटकर बोई जाती है। ऐसे में देर से बुवाई वाला रकबा काफी है। देर से बोयी जाने वाली गेहूं वैसे ही कम निकलती है। लेकिन जल्दी मौसम गरमाने से उसमें दोहरा नुकसान होगा। बालियां निकलने से लेकर उनमें दाना पड़ने और पकने तक तापमान अधिक रहेगा जिससे बालियां और दाने छोटे तथा सूखे रहेंगे।

इससे उत्पादन पचास फीसदी तक गिरने की आशंका है। किसानों का कहना है कि इस बार गेहूं प्रति बीघा डेढ़ से दो कुन्तल ही निकल सकता है। इससे लागत भी नहीं निकलेगी। कम रखना और औसत से कम उत्पादन के कारण सरकारी क्रय केन्द्रों पर इस बार गेहूं गत वर्ष से भी कम पहुंचेगी।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.


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