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अन्ना हजारे के नेतृत्व में बड़े आंदोलन को तैयार अन्नदाता

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इस सिलसिले में अन्ना हजारे भाकियू असली के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरपाल सिंह से एक पंचायत में समर्थन मांग चुके.

फसलों का वाजिब मूल्य न मिलने तथा उर्वरक, कृषि यंत्र और कीटनाशकों की लगातार बढ़ रही कीमतों से परेशान किसान एकजुट होकर बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं। सरकार और आला अधिकारियों के झूठे आश्वासनों से आजिज अन्नदाता के सामने अब सड़क पर उतरने के अलावा कोई चारा नहीं।

किसान नेताओं का कहना है कि भाजपा सरकारों से उन्हें उम्मीद थी। उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इसीलिए उसे भारी बहुमत से सत्ता सौंपी। देश और प्रदेशों की किसी भी भाजपा सरकार ने किसानों से किये वादे पूरे नहीं किये बल्कि किसानों ने जब भी अपने दर्द को बयान करने के लिए आवाज उठाई तो उसे सरकारों ने अनसुना किया बल्कि कई जगह किसानों पर बल प्रयोग कर दबाने की कोशिश भी की गयी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात तथा महाराष्ट्र के किसान काफी समय से आंदोलित हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के चालीस हजार से अधिक किसान अपनी मांगों को लेकर पुणे से मुम्बई तक पैदल चलकर विधानसभा का घेराव करने की नीति बनाने को बाध्य हुए। वे शांतिपूर्ण पैदल मार्च कर मुम्बई पहुंचे। चालीस दिनों तक शांतिपूर्ण मार्च करने वालों की आवाज प्रदेश और केन्द्र के कानों तक तबतक नहीं पहुंची जबतक वे विधानसभा के करीब नहीं पहुंच गये तथा कई अन्य संगठन भी उनके साथ आने को तैयार नहीं हो गये।

प्रधानमंत्री की छोटी से छोटी गतिविधि को प्रसारित करते रहने वाले टीवी चैनलों ने अन्नदाताओं की भारी भीड़ को इसलिए प्रमुखता नहीं दी कि इससे उनकी चहेती सरकार की छवि खराब होगी। अन्नदाता के लिए लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया में किसानों के लिए कोई दिलचस्पी नहीं।

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2013 में तत्कालीन केन्द्र सरकार (यूपीए) के खिलाफ दिल्ली में रामलीला मैदान से आंदोलन शुरु करने वाले अन्ना हजारे को भी चुनाव करीब आते ही किसानों की याद आ गयी है। चार साल से मुंह छुपाये बैठे इस कथित समाजसेवी ने भी किसानों के बदलते तेवरों को भांप कर एक बार फिर से सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ किसानों को एकजुट कर बड़ा आंदोलन करने की आवाज उठानी शुरु कर दी है। 

अन्ना ने 23 मार्च को एक विशाल रैली की घोषणा की है। जिसमें भीड़ जुटाने को वे कई माह से किसान नेताओं से संपर्क कर रहे हैं। इस सिलसिले में वे भाकियू असली के राष्ट्रीय अध्यक्ष हरपाल सिंह से एक पंचायत में समर्थन मांग चुके। जबकि किसान संगठनों से जुड़े कई दूसरे नेताओं से भी मिले हैं। पता चला है कि भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत, किसान नेता पुष्पेन्द्र सिंह, कई किसान संगठनों के संयोजक स. वीएम सिंह आदि से भी वे जल्दी ही बात करने वाले हैं।

इधर एक माह से भाकियू संगठन की जिला, तहसील और ब्लॉक इकाईयां जनपद, तहसील तथा ब्लॉक स्तर पर पंचायतें कर किसानों की समस्यायें अधिकारियों के सामने रखकर, ज्ञापनों के जरिये सरकार से समस्याओं के समाधान की मांग कर रही हैं। समाधान न होने पर बड़े आंदोलन की तैयारियां भी चल रही हैं। इस बार फिर उत्तर प्रदेश से बड़े किसान आंदोलन की तैयारी है। इसी से पता चलता है कि किसान सरकार की नीति और नीयत को समझ गये हैं तथा उनके पास टिकैत आंदोलन की तर्ज पर बड़ा आंदोलन छेड़ने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.