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टीडीपी के बाद गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने छोड़ा एनडीए का साथ, धोखा देने का लगाया आरोप

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लामा ने कहा कि हमें उम्मीद थी कि गोरखाओं की समस्याएं सुलझाने में भाजपा कुछ करेगी लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

मोदी सरकार की मुश्किलें उसके सहयोगी दल बढ़ा रहे हैं. इसकी शुरुआत तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने की है. गोरखपुर और फूलपुर के चुनाव को बीजेपी भले ही कहती रही कि उससे कोई खास फर्क नहीं पड़ा, लेकिन लगता तो यही है कि उसके बाद बीजेपी के सहयोगियों में पार्टी की स्थिति पहले जैसी नहीं रही है. यह कहना गलत नहीं होगा कि बीजेपी अपने सहयोगियों में कमजोर हालत में नज़र आ रही है. ताज़ा तलाक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) से हो गया है. एनडीए से अलग होने वाली एक माह में यह दूसरी पार्टी बन गयी है. हालांकि इससे बीजेपी के सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला, लेकिन कुछ कमजोरी का पार्टी को जरुर एहसास होगा. साथ ही भविष्य की योजनाओं के खाके पर भी असर पड़ेगा.

जीजीएम के नेता एलएम लामा ने एनडीए छोड़ने का एलान करते हुए कहा कि उनकी पार्टी का बीजेपी और एनडीए से कोई नाता नहीं रहा. उन्होंने भाजपा पर गोरखा लोगों को धोखा देने का गंभीर आरोप लगाया है. कहा जा रहा है कि जीजेएम ने पश्चिम बंगाल के बीजेपी प्रमुख दिलीप घोष के बयान के बाद यह किया है. वे उनके बयान से आहत थे. इसलिये जीजेएम ने अलग होने का फैसला किया है.

बंगाल के बीजेपी प्रमुख दिलीप घोष ने कहा था कि गोरखा जमनुक्ति मोर्चा से बीजेपी का केवल चुनावी गठबंधन है और पार्टी से किसी भी राजनीतिक मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया गया है. वहीं जीजीएम के नेता लामा ने कहा कि गठबंधन धर्म निभाते हुए हमने पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग संसदीय सीट दो बार बीजेपी को उपहार में दे दी. हमें उम्मीद थी कि गोरखाओं की समस्याएं सुलझाने में भाजपा कुछ करेगी लेकिन उन्होंने ऐसा करने के बजाय बार-बार धोखा दिया.

इससे पूर्व तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने इसी महीने एनडीए छोड़ दिया था. पार्टी ने भी बीजेपी पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया था.