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महाराष्ट्र में पहले चिक्की, फिर चूहा और अब 'चाय घोटाला'

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 संजय निरुपम ने तंज कसा कि भाजपा वालों को चाय से कुछ ज्यादा ही लगाव है. 

महाराष्ट्र में समय-समय पर नए और अजीब नाम के घोटाले सामने आते रहते हैं. हाल में हुए चूहे घोटाले के बाद राज्य में 'चाय घोटाला' सामने आया है. जब से बीजेपी की राज्य में सरकार बनी है, घोटालों की चर्चा आयेदिन हो रही है. ख़बरों के अनुसार करीब साढ़े तीन करोड़ की चाय मुख्यमंत्री देवेन्द्र फणनवीस कार्यालय में 2017-18 के दौरान पी गयी. यह पिछले दो वर्षों के मुकाबले 577 प्रतिशत अधिक है.

कांग्रेस ने आरटीआई के जरिये जुटाई जानकारी के हवाले से कहा है कि महाराष्ट्र की सरकार ने चाय-पानी घोटाला किया है. मुख्यमंत्री कार्यालय ने साल 2015-16 में चाय-पानी पर करीब साठ लाख रूपये खर्च किये. उसके अगले साल में एक करोड़ बीस लाख का खर्च आया. निरुपम ने आरोप लगाया कि 2017-18 में रिकॉर्ड टूट गया. चाय पर 3 करोड़ 34 लाख रूपये खर्च किये गये. यह एक बड़ा घोटाला है जिसकी जल्द जाँच होनी चाहिए.

इस हिसाब से तो महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री कार्यालय में रोज 92,000 चाय पानी पर खर्चा किया जा रहा है. हालाँकि मुख्यमंत्री कार्यालय ने निरुपम के आरोप निराधार बताते हुए कहा कि यह खर्च कई जगह का है जिसमें सरकारी अतिथिगृह, हैदराबाद हाउस आदि शामिल है. कहा गया ही बीते दो साल में सरकारी बैठकों की संख्या में वृद्धि हुई है.

संजय निरुपम ने कहा है कि जिस तरह बीजेपी के मंत्री ने एक हफ्ते में 31 हज़ार चूहे मंत्रालय में मरवा दिए, उसी तरह चाय भी पी ली गयी. उन्होंने तंज कसा कि भाजपा वालों को चाय से कुछ ज्यादा ही लगाव है. महारष्ट्र में किसान जहाँ आत्महत्या कर रहे हैं, मुख्यमंत्री कार्यालय में रोजाना चाय पर इतने पैसे बर्बाद हो रहे हैं.

वैसे महाराष्ट्र में पंकज मुंडे पर चिक्की घोटाले का आरोप लगा था. उसके बाद चूहा घोटाला सामने आया. और अब चाय घोटाले की चर्चा है.