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दलित, पिछड़े और मुस्लिमों को एकजुट करने में जुटा विपक्ष

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विपक्षी दल 2019 की तैयारी में जोरशोर से जुट गए हैं ताकि मौजूदा सरकार को उखाड़ फेंका जा सके.

उत्तर प्रदेश में आगामी लोकसभा चुनाव जातीय आधार पर लड़ा जाएगा। गोरखपुर और फूलपुर के ताजा संसदीय चुनाव के परिणामों से यह मुद्दा और भी जोर पकड़ गया है। भाजपा भले ही इसके लिए विपक्षी दलों के नेताओं पर दोषारोपण करे लेकिन उसने सत्ता में आते ही ब्राह्मण और ठाकुर समुदाय को प्रधानता देकर पिछड़े तथा दलित समुदायों को एकजुट करने का मौका प्रदान किया है। अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय पहले ही भाजपा की नीतियों का  विरोधी रहा है। किसान और मजदूरों में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों के ही लोग हैं। जिस प्रकार से एक दूसरे के धुर विरोधी सपा और बसपा प्रदेश में एक छतरी के नीचे आए हैं, उसका यही कारण है। दोनों प्रदेश की ताजा मानसिकता को समझकर ही एक साथ कदमताल करने को तैयार हुए हैं। यदि कांग्रेस उनका साथ ना भी दे और रालोद को यह अपने साथ जोड़ लें तब भी प्रदेश की अधिकांश सीटों पर भाजपा को हराना बड़ी बात नहीं।

गोरखपुर और फूलपुर के परिणामों से एक बात और स्पष्ट हो गई, वह है जनता का सभी दलों से विश्वास उठना। शांतिपूर्ण माहौल में भी जहां आधे लोग मतदान केंद्रों तक ना जाए तो उसे क्या कहा जाएगा?

रोजगार जिंदा रहने की सबसे बड़ी जरूरत है। चार साल केंद्र तथा एक साल प्रदेश की भाजपा सरकारों ने नवयुवकों को निराश किया है। जिस सूबे की एक बड़ी मानव शक्ति खाली हाथ बैठी हो उसका जीवन कितना कठिन होगा? खाली दिमाग शैतान का घर होता है तथा बुभिक्षतः किम न करोति पापं के आधार पर युवा अपराधों की ओर बढ़ रहे हैं। भले ही योगी सरकार पुलिस मुठभेड़ से अपराध नियंत्रण का दावा करें लेकिन मजबूर, खाली युवाओं को रोकना आसान नहीं। विपक्षी दलों की एकजुटताअब इन्हीं युवाओं को एकजुट कर चुनाव जीतना चाहेगी, जिन्हें सब्जबाग दिखाकर भाजपा ने पहले लोकसभा और बाद में विधानसभा चुनाव जीता था।

-जी.एस. चाहल.