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तीन पालिकाओं पर एक इओ एक, कैसे बनेंगे स्मार्ट नगर?

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अमरोहा, हसनपुर तथा गजरौला की आबादी शेष 5 निकायों से दोगुना से भी ज्यादा है.

मौजूदा अधिशासी अधिकारी के रहते ना तो गजरौला स्मार्ट शहर बन सकता है और ना ही अमरोहा और हसनपुर अतिक्रमण मुक्त नगर बन सकते हैं। इन दोनों का एक ही ईओ होना विकास में सबसे बड़ी बाधा है। इन नगरों के विकास के बारे में सक्रिय रहने का इ.ओ के पास समय ही नहीं है। पंचम तल पर लखनऊ में मजबूत पैठ के कारण इस अधिकारी ने जिले की तीनों सबसे बड़ी  पालिकाओं का चार्ज हथियाने में सफलता हासिल की है। नगर के कुछ जागरूक नागरिक जल्दी ही  तीनों नगरों के अलग-अलग ईओ नियुक्त किए जाने के लिए मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात करेंगे। उससे पहले वे इस संबंध में उन्हें एक पत्र लिखेंगे।

गजरौला प्रदेश का बड़ा औद्योगिक नगर है जहां से देश और प्रदेश की राजधानियों को जोड़ने वाले हाईवे के साथ रेल जंक्शन भी है। आबादी के लिहाज से जिले का यह दूसरा सबसे बड़ी आबादी का नगर है। इतने महत्वपूर्ण नगर के लिए एक ईओ होना चाहिए। मौजूदा ईओ विजेंद्र पाल को जिले की कुल पांच पालिकाओं में से तीन का कार्यभार मिला हुआ है। ईओ की कमी के चलते उन्हें एक पालिका के साथ एक नगर पंचायत का कार्यभार दिया जाता तो ज्यादा बेहतर होता।

जिले में पांच पालिका तथा तीन नगर पंचायत सहित कुल 8 नगर निकाय हैं। इनमें से इसी तरह किसी दूसरे ईओ को भी एक पालिका व एक नगर पंचायत का दायित्व दिया जा सकता है, जो बेहतर होता। 

अमरोहा, हसनपुर तथा गजरौला की आबादी शेष 5 निकायों से दोगुना से भी ज्यादा है। पांच पर पांच ईओ और तीन पर केवल एक ही ईओ, यह प्रदेश सरकार की कौन-सी न्याय संगत नीति है। निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी भी पहले की तरह जारी है। तीन नगरों के विकास कार्यों में खर्च किए जाने वाली राशि में सभासदों से बात कही जा रही है। क्या पंचम तल पर सांठगांठ कर ईओ ने जिले की तीनों बड़ी पालिकाओं पर इसीलिए कब्जा किया है? मुख्यमंत्री को इसका संज्ञान लेकर इसकी जांच करनी चाहिए ताकि पता चल सके कि ऐसा क्यों हुआ?

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.