Header Ads

बदहाल बिजली व्यवस्था से जनता बेहाल : कानून-व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी, लोग आपा खोने को तैयार

electricity-problem-amroha
आयेदिन किसानों के धरने-प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसका बिजली कर्मियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा.

मौसमी पारा चढ़ते ही बिजली व्यवस्था चरमरा गयी है। कई गांवों में हफ्तों से बिजली गायब है। चिचिलाती धूप में फसलें झुलस रही हैं। डीजल के भाव आसमान पर होने से डीजल इंजन का खर्च वहन करना खेती में भारी घाटा उठाना है। बिजली की आंख मिचौनी के कारण कई जगह लोगों में उबाल है। महंगे बीज, खाद और जुताई से तैयार फसलों को आंखों के सामने सूखता देख कई किसान आपा खोने को तैयार हैं। कई जगह किसानों और बिजली वालों में इसी कारण विवाद और झगड़े शुरु हो गये हैं।

शासन और प्रशासन के साथ बिजली विभाग के आला अधिकारियों को इसे गंभीरता से लेना होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अखबारों में विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च कर सरकार का प्रचार कर रहे हैं। इस धन को बिजली पर लगायें तो बेहतर होगा। वे गांवों को 18 घंटे बिजली के दावे करते फिर रहे हैं। जबकि  गांवों में औसतन चार-पांच घंटे भी बिजली नहीं मिल रही। कई जगह बिजली आती है तो वोल्टेज इतने लो होते हैं कि मोटरें नहीं घूम पातीं। 

बिजली विभाग के एक्सिएन, एसडीओ या जेई लोगों से इस तरह व्यवहार कर रहे हैं जैसे वे घर से बिजली दे रहे हों। बिजली बिल जमा करने तक में लोगों से अवैध वसूली की जा रही है। ईमानदार उपभोक्ताओं के साथ मनमानी की जा रही है। कनैक्शन काटने की धमकियां देकर अवैध वसूली की जा रही है।

भाकियू के नेतृत्व में आयेदिन किसानों के धरने-प्रदर्शन हो रहे हैं, जिसका बिजली कर्मियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा। खंभे टूटकर गिरने, तार टूटने और ट्रांसफार्मर फुंकने की घटनाएं बढ़ रही हैं। यह विभाग में व्यापत भ्रष्टाचार तथा नौकरशाहों की धींगामुश्ती के कारण हैं। राज्य सरकार इनपर अंकुश नहीं लगा पा रही। बढ़ती गर्मी में चरमराती बिजली व्यवस्था, कानून व्यवस्था को खराब कर सकती है। यह जनता के साथ सरकार की सेहत के लिए भी खतरनाक होगी। मोटी पगार और तमाम सुविधाओं का लाभ ले रहे अधिकारियों पर सरकार को शिकंजा कसना होगा।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.