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आंधी के कहर के बावजूद फलों से लदे हैं आम के बाग

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आम के पेड़ आमों से लदे हैं तथा और आंधी नहीं आयी तो ठेकेदार घाटे में नहीं रहेंगे.

देशभर में आम उत्पादन के लिए विख्यात जनपद में पिछले दिनों अचानक आयी आंधी ने आम की फसल पर जमकर कहर बरपाया था। एक चौथाई आम देखते ही देखते टूटकर बिखर गया। इससे आम के ठेकेदारों को करारा झटका लगा था। इतना कुछ होने के बाद भी आम के पेड़ आमों से लदे हैं तथा और आंधी नहीं आयी तो ठेकेदार घाटे में नहीं रहेंगे।

आंधी से एक साथ अधिक आम गिरने से बाजारों और मंडियों में उनकी कीमत नहीं मिल रही। जिससे काफी आम पेड़ों के नीचे ही पड़ा-पड़ा सूख रहा है। बाग ठेकेदारों का कहना है कि आम इकट्ठा करने की मजदूरी भी नहीं मिल पा रही इसलिए गिरा आम नहीं उठवाया जा रहा। यदि यही आम पन्द्रह दिन बाद गिरता तो इसके ठीक दाम मिलते। वह पकाया भी जा सकता था।

गौरतलब है जिले में सैकड़ों किस्म के आम हैं लेकिन दशहरी, लंगड़ा, चौंसा, फजली, गुलाब जामुन और बम्बई बड़े पैमाने पर है। यह आम कई देशों को निर्यात भी होता है। दशहरी और लंगड़ा विदेशों में खूब पसंद किया जाता है। इस बार भी हजारों टन आम के आर्डर यहां के निर्यातकों को मिले हैं। बछरायूं, धनौरा और हसनपुर सहित पूरे जनपद में आम के हरेभरे बाग हैं। जिन्हें लोग फसल के मौके पर ठेकेदारों को एकमुश्त तय रकम पर बेचते हैं। मौसमी मार या लाभ से उनका कोई लेना-देना नहीं होता। सरकारी स्तर से आम उत्पादकों या ठेकेदारों को कोई सहायता नहीं मिलती। लंबे समय से जिले को फसल पट्टी घोषित कर तत्संबंधी सहूलियतों की मांग की जाती रही है लेकिन अभी ऐसा नहीं हो सका।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.