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अंधड़ की भविष्यवाणी से सिहर उठते हैं बाग वाले

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तीन बार तूफानी हमलों में बहुत आम गिरा लेकिन फिर भी लंगड़ा गिरते-गिरते बहुत कुछ बच गया.

इस माह के अंदर आये अंधड़ और तूफान ने आम उत्पादन में अग्रणी जनपद में तबाही मचाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। आमों से लदे पेड़ों को देखकर इस बार बागवानों के चेहरों पर जो खुशी थी वह तीन मौसमी हमलों ने छीनने की भरपूर  कोशिश की लेकिन 40 फीसद तक आम धराशायी होने के बावजूद अभी पेड़ों पर काफी आम लदा है। इसे मौसम की मार से बचाए रखने को सिंचाई का ध्यान रखा जा रहा है और ऊपर वाले से दुआ भी की जा रही कि अब बख्श दे!

वैसे तो यहां लंगड़ा, दशहरी, चौंसा, बम्बई, गुलाब जामुन आदि दर्जनों प्रजातियों के आम हैं लेकिन सबसे अधिक लंगड़ा आम के बाग हैं। लंगड़े के पेड़ दशहरे आदि से बड़े होते हैं। आम भी भरपूर आया है। तीन बार तूफानी हमलों में बहुत आम गिरा लेकिन फिर भी लंगड़ा गिरते-गिरते बहुत कुछ बच गया है। सभी तरह के आम गिरे हैं।

बाग ठेकेदारों का कहना है कि अभी मौसम विभाग मौसम खराब होने और आंधी तूफान की भविष्यवाणियां कर रहा है। यह बहुत चिंता का विषय है। यदि और आंधियां आई तो बाग वाले बर्बादी के कगार तक पहुंच जाएंगे। इतने तूफानों में लंगड़ा हो या दशहरी कोई नहीं बचने वाला। जून से पहले गिरा आम किसी भाव नहीं बिकता। कच्चे आम को कई अचार बनाने वाली कंपनियां खरीदते हैं लेकिन आंधी से इतना आम गिर जाता है कि उसे कोई नहीं पूछता। लोग माटी के भाव भी नहीं लेते। इकट्ठा करने से ट्रांसपोर्ट तक लाने, पैकिंग खर्च और बाजार तक का किराया भी इसमें नहीं मिलता। ऐसे में बाग में ही जो मिल जाए और जितना भी बिक जाए ठीक है।

कई बागों में तीन अंधड़ों में गिरे आम से बहुत सा आम अभी भी पेड़ों के नीचे पड़ा पड़ा सूख रहा है। जिसे कोई उठाने वाला भी नहीं मिल रहा।

फलों का राजा कहा जाने वाला आम आज मौसम की मार से त्राहि त्राहि कर रहा है। यही हाल उसके उत्पादकों का है।

साथ में पढ़ें : आंधी के कहर के बावजूद फलों से लदे हैं आम के बाग

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.