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मुरादाबाद का पीतल उद्योग गलत सरकारी नीतियों से डगमगाया

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ढाई हज़ार इकाईयों के ढाई लाख मजदूर आर्थिक संकट की दहलीज पर हैं.

दुनियाभर में पीतल उत्पादों के लिए विख्यात मुरादाबाद का हस्तशिल्प उद्योग जीएसटी लागू होने के बाद बुरी तरह लड़खड़ा गया है। जीएसटी के अनापशनाप ढंग से लगाने के साथ ही सरकार ने इस कारोबार को करने वाले लोगों पर चौतरफा आर्थिक बोझ डाला है। पीतल, एल्यूमीनियम और ग्लास उत्पादों पर ड्राबैक बुरी तरह कम कर दिया है। जीएसटी रिफंड का एक हजार करोड़ रुपया सरकार दबा कर बैठ गयी। देश-विदेश में होने वाले शो में भाग लेने वाले निर्यातकों की स्टाल के खर्च पर भी जीएसटी लाद दी है।

अमेरिकी प्रतिबंध के कारण ईरान से आर्डर मिलने बंद है तथा निर्यातकों के छह सौ करोड़ के आर्डर बायर्स ने होल्ड कर दिए हैं। ऐसे में मुरादाबाद की कुल 2500 फैक्ट्रियां तथा उनमें प्रत्यक्ष रुप से जुड़े ढाई लाख लोगों का रोजगार खतरे में पड़ गया है। निर्यातक सरकार से अपनी दिक्कतों का रोना रोते-रोते बेहाल हैं लेकिन तेज औद्योगिक रफ्तार के ढोल पीटने वाली सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही। 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष में निर्यात में बीस फीसद की गिरावट आयी है जिसके और बढ़ने का खतरा स्पष्ट दिखाई दे रहा है।

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मुरादाबाद दुनियाभर के सौ से अधिक देशों को प्रतिवर्ष करीब 8 हजार करोड़ का निर्यात करता है। बीते वित्त वर्ष में यह करीब 16सौ करोड़ रुपये घट गया है। जबकि इससे पूर्व निर्यात में इजाफा होता रहा है। अमेरिका, ईरान, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, आस्ट्रेलिया, दुबई, ब्रिटेन आदि देश यहां के हस्तशिल्प उत्पादों के बड़े खरीददार हैं।

पहले नोट बंदी, बाद में जीएसटी लागू करने से यह उद्योग डगमगाना शुरु हुआ। एकल टैक्स के नाम पर कई बार जीएसटी लगाया गया है। कच्चे माल पर, उसके बाद तैयार माल पर तथा व्यापार मेलों में स्टाल लगाने पर भी जीएसटी लादा गया है। इसी के साथ निर्यात पर मिलने वाले ड्रा-बैक में भी भारी कटौती कर निर्यातकों की कमर तोड़ने का काम सरकार ने किया है।

पीतल पर मिलने वाले 10.18 फीसदी ड्रा-बैक को घटाकर 2.1, एल्यूमीनियम पर 6.9 फीसद से घटाकर 1.5 फीसदी तथा ग्लास पर 7.5 फीसदी की जगह तीन फीसद कर दिया। विभिन्न देशों में होने वाले एक्सपोर्ट शो इंडस्ट्री उत्पादों के प्रचार प्रसार का बेहतर माध्यम होते हैं। भारत सरकार ने इस खर्च पर अलग से जीएसटी ठोक दी। इससे स्टाल लगाने का खर्च पहले से लगभग डेढ़ गुना हो गया है। आगे और भी खराब होने के आसार हैं।

मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टस एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष में निर्यात बीस फीसदी तक गिर चुका। नये आर्डर मिलने बंद हैं। सरकार पर पिछला रिफंड फंसा पड़ा है। टैक्स की मार से सामान महंगा हो गया है। 

ऐसे में इंडस्ट्री के हालात और भी बदतर होंगे। इससे यहां की ढाई हजार इकाईयां और उनसे सीधे जुड़े ढाई लाख कामगारों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराने की स्थिति उत्पन्न होने लगा है। चौतरफा टैक्सों के बोझ और रियायतें बंद करने से सरकार का राजस्व बढ़ने के बजाय घटेगा। उसे निर्यातकों से बात कर उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

-जी.एस. चाहल/मुरादाबाद.