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परिषदीय विद्यालयों में नहीं पहुंच रहे बच्चे

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अध्यापकों से लेकर मोटा वेतन और दूसरी सुविधाएं हासिल करने वाले अधिकारी इसी तरह शिक्षा का बेड़ा डुबोते रहेंगे.

प्रशासन और शिक्षा विभाग के आला अफसरों की लाख कोशिशों के बावजूद परिषद स्कूलों में बच्चे नहीं पहुंच रहे। अब बहाना बनाया जा रहा है कि बच्चे गेहूं की कटाई में लगे हैं इसलिए स्कूलों में नहीं पहुंच रहे। बीएसए से लेकर बी ई ओ तक यही बहाना बना रहे हैं। कई पत्रकार भी हकीकत की गहराई तक पहुंचे बिना इन  अधिकारियों तथा अध्यापकों के बहाने बनाने को ठीक मानकर अखबारों के पन्ने रंगने को मजबूर हैं।

गजरौला के बीईओ राकेश कुमार गौड़ से जब परिषदीय स्कूलों में बच्चों की बहुत कम उपस्थिति का कारण पूछा गया तो उन्होंने बड़े ही सधे हुए ढंग से बहाना बनाते हुए कहा कि अभी गेहूं की कटाई चल रही है जो अंतिम चरण में है। धीरे-धीरे उपस्थिति ठीक हो जाएगी। अध्यापकों से भी लोगों के घरों में जाकर बच्चों को स्कूल भेजने को कहा है। यह बयान दो मई को हमारे रिपोर्टर के साथ ही  कई पत्रकारों को दिया गया है।

पाठकों को पता है कि यहां गेहूं की कटाई कभी की समाप्त हो चुकी और गेहूं उठकर बाजारों तक पहुंच गया। बीईओ सफेद झूठ बोलकर हकीकत पर पर्दा डालना चाहते हैं। यही नहीं बीएसए तथा कई अध्यापकों ने भी कम उपस्थिति का बहाना गढ़ा।

गजरौला की सीमा से सटे गांव फौंदापुर के प्राथमिक स्कूल में 45 का पंजीयन होने के बावजूद 20 बच्चे ही मौजूद थे। जबकि यही के पूर्व माध्यमिक स्कूल में 49 में से मात्र 18 बच्चे ही स्कूल में आ रहे हैं। कई अन्य स्कूलों में इनसे भी कम बच्चे मिले। मई माह में कटाई का बहाना चलता रहेगा और जून की छुट्टियां हो जाएंगी। जुलाई और अगस्त में धान की रोपाई का बहाना चलता रहेगा। अध्यापकों से लेकर मोटा वेतन और दूसरी सुविधाएं हासिल करने वाले अधिकारी इसी तरह शिक्षा का बेड़ा डुबोते रहेंगे।

नवंबर से लोकसभा चुनाव की मतदाता सूचियों और बाद में चुनाव की ट्रेनिंग तथा दूसरी तैयारियों में यह लोग लगाए जाएंगे। इस तरह सरकारें, उसके अफसर और अध्यापक सरकारी स्कूलों को  संचालित करते रहेंगे।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा