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बाहा नदी पुल निर्माण : जनता के दर्द के बजाय अपना पेट भरते रहे ताकतवर नेता

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प्रदेश सरकार में मंत्री चेतन चौहान और संसद तंवर चाहें तो बन जायेगा बाहे पर पुल.
चकनवाला गांव के निकट बाहा नदी पर पुल के निर्माण की मांग भी लोग सभी पार्टी के नेताओं से करते रहे तथा चुनावी मौसम में वायदे भी कई नेता करते रहे परन्तु कैप्सूल पुल के अलावा कुछ प्रगति नहीं हुई.

पहले भले ही इस क्षेत्र में कोई मजबूत नेता न रहा हो लेकिन बीते ढाई दशक में यहां कई ऐसे नेताओं का उदय हुआ जिनकी सरकारों में तूती बोलती रही है तथा शीर्ष नेतृत्व उन्हें महत्व देता रहा है लेकिन यह क्षेत्र का दुर्भाग्य कहें या नेताओं का बेहद स्वार्थीपन, उन्होंने क्षेत्रीय विकास की ओर कम ही ध्यान दिया बल्कि सत्ता की ताकत का इस्तेमाल निजि स्वार्थों में ही अधिक किया।

प्रदेश में कांग्रेसी सत्ता के पतन तथा भाजपा, सपा और बसपा के उदय में ऐसे कई नेता राजनीतिक मंच पर उभरे तथा एक-दो पुराने नेताओं को भी मंत्रीपद का स्वाद मिला। चकनवाला गांव के निकट बाहा नदी पर पुल के निर्माण की मांग भी लोग इन सभी से करते रहे तथा चुनावी मौसम में वायदे भी कई नेता करते रहे परन्तु कैप्सूल पुल के अलावा कुछ प्रगति नहीं हुई।

जनपद में जिन ताकतवर नेताओं का अपनी-अपनी सरकारों में बराबर दखल रहा उनमें स्व. रमाशंकर कौशिक, पूर्व मंत्री महबूब अली तथा पूर्व मंत्री कमाल अख्तर का नाम सबसे ऊपर है। ये तीनों सपा सरकारों में ताकतवर मंत्री रहे। जबकि महबूब अली को बसपा में भी मंत्री पद मिला था।

देखा जाये तो रमाशंकर कौशिक इसी विधानसभा क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करते रहे। जबकि महबूब अली और कमाल अख्तर भी इसी जनपद की विधानसभाओं से चुने गये थे। हालांकि कौशिक और कमाल राज्यसभा में भी मनोनीत हुए। यदि इनमें से कोई भी नेता चाहता तो चकनवाला का पुल बनने से कोई नहीं रोक सकता था। इन तीनों की अपने आकाओं के दरबार में ही जबर्दस्त घुसपैठ नहीं थी बल्कि ये उन सरकारों में मजबूत स्तंभ थे। इसी से पता चलता है कि इन लोगों ने चाहते हुए भी एक पुल को बनवाने की जहमत नहीं उठायी। रमाशंकर आज इस दुनिया में नहीं हैं तथा महबूब विपक्षी विधायक हैं और कमाल बेचारे विधायक भी नहीं हैं, तो इस समय वे क्या करेंगे जबकि हाथ में बड़ी ताकत के होते हुए भी वे कुछ नहीं कर पाये।

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आज केन्द्र और राज्य में भाजपा की भारी बहुमत की सरकारे हैं तथा सांसद भाजपा से हैं और चेतन चौहान कैबिनेट मंत्री भी यहीं से विधायक हैं। राजीव तरारा तथा महेन्द्र सिंह खड़गवंशी भी दोनों भाजपा विधायक यहीं से हैं। इसमें केन्द्र से सांसद को तथा सूबे से चेतन चौहान को पुल निर्माण कराने की कोशिश करनी चाहिए। वैसे यह काम अब तक सांसद चाहते तो हो सकता था क्योंकि चकनवाला गांव को गोद लिए उन्हें चार साल बीत चुके और सबसे मजबूत वादा भी कंवर सिंह तंवर ने ही किया था। वे आर्थिक रुप से मजबूत हैं तथा उन्होंने चुनाव प्रचार में भरोसा भी दिलाया था कि उन्हें जिताया तो वे अपने पास से धन खर्च कर यह पुल बनवा देंगे। जीतने के बाद उनका कार्यकाल पूरा होने को है लेकिन तंवर ने पुल तो क्या उधर जाना ही छोड़ दिया है। तमाम खादर के लोगों का कहना है कि वे इस बार चुनाव और लड़ें तथा इधर आयें तो उनका ऐसा स्वागत करेंगे जिसे वे जीवन भर नहीं भूलेंगे।

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चेतन चौहान दो बार यहां से सांसद भी रह चुके तथा गजरौला में उनकी एक पेपर मिल है। साथ ही वे गजरौला इंडस्ट्रीज वैलफेयर एसोसियेशन के दशकों से चेयरमैन भी हैं। विख्यात क्रिकेटर होने के नाते भी उनकी सरकार में मजबूत पहुंच है। उनके लिए खादर की इस बड़ी समस्या का निदान बायां हाथ का खेल है लेकिन क्रिकेटर के खेल के माहिर इस नेता को आम आदमी की दिक्कतों से कोई सरोकार हो तभी कुछ हो सकता है।

भाजपा नेता देवेन्द्र नागपाल यहां से सांसद और विधायक रहे हैं। उनके बड़े भाई हरीश नागपाल भी सांसद रहे तथा बसपा के तत्कालीन विधायक हाजी शब्बन भी बसपा में मजबूत माने जाते थे। हालांकि आज इन तीनों ही के पास कोई बड़ी सियासी ताकत नहीं है लेकिन अपने कार्यकाल में इस ओर इन्होंने भी कोई ध्यान नहीं दिया। वैसे अस्थायी पीपा पुल बनवाकर कौशिक ने इस दिशा में इन सभी नेताओं के मुकाबले कुछ तो किया। हो सकता है वे इसे स्थायी पुल बनवाने की भी सोचते रहे हों लेकिन उनके अवसान के बाद चर्चा का कोई महत्व नहीं।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.