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पुल निर्माण के लिए बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं यहाँ के छात्र नेता.
पेंटून पुल को स्थायी पुल में बदलने के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण-पत्र जरुरी है। यह स्थान हस्तिनापुर सेंचुरी में पड़ता है। जिस स्थान पर पुल बनना है, वह भी वन विभाग की ही भूमि है। इस काम के लिए लखनऊ से दिल्ली तक भागदौड़ की जरुरत है। हालांकि इसमें अमरोहा के डीएफओ की महत्वपूर्ण भूमिका है। वह चाहें तो काम सरल हो सकता है। सभी जानते हैं कि इस विभाग के अधिकारी जनहित के कार्यों में सहयोग के बजाय रोड़े अटकाने का ही काम करते हैं।

पाठकों को स्मरण कराना चाहेंगे कि अमरोहा तथा मंडी धनौरा के वन विभाग के अधिकारियों की शह पर बीते पांच-छह वर्षों में आम के हरे-भरे बाग कटवा दिए गये। सिहाली गोसाईं तथा बछरायूं में थाने से चन्द कदम दूर बिजनौर-गजरौला मार्ग के किनारे कुम्हारपुरा से सटे आम के बागों को खुलेआम काट दिया गया। न वन विभाग ने रोका और न ही पुलिस कुछ कर पाई। इसके विपरीत गजरौला में रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण एक पिलखन के पेड़ ने वर्षों तक रोके रखा, वजह वन विभाग से एनओसी न मिलना थी।

नगर पंचायत में लोगों को रोजगार के लिए बनवाई दुकानों के लिए सफेदे के पेड़ एक दशक पूर्व तत्कालीन चेयरमैन महेन्द्र सिंह ने कटवाए, उनका मुकदमा महेन्द्र सिंह पर अबतक चल रहा है। वक्त जरुरत पर अपना बोया पेड़ काटने के लिए भी गरीबों पर विभागीय चाबुक चल पड़ता है।

जिस स्थान पर पुल बनना है, वहां उससे बहुत दूर तक भी कोई पेड़ या पेड़ का बच्चा नहीं है। लोगों की दिक्कतों से भी वन विभाग के छोटे-बड़े अधिकारी भली-भांति परिचित हैं, लेकिन इस जनहित के काम के लिए वे आगे आने को तैयार नहीं। नेता उनसे भी बढ़कर हैं, वे किसी तरह की भागदौड़ क्यों करें?

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खादर के ही कई पढ़े-लिखे नौजवानों ने एक साल पूर्व भागदौड़ कर कागजी कार्रवाई काफी आगे बढ़वाई। इनमें नैपाल सिंह राणा, संदीप भड़ाना तथा दीपक भड़ाना जैसे नाम शामिल हैं। नेताओं ने इन्हें भी विभाजित करने का काम किया बल्कि दीपक भड़ाना की बढ़ती लोकप्रियता के चलते उनके खिलाफ कई मुकदमे भी दर्ज करा दिए। इधर संदीप भड़ाना तथा नैपाल राणा की टीम एक बार फिर इस काम के लिए डीएम के कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन का मन बना चुकी। जिसे जल्दी ही शुरु किया जायेगा। ये जन सहयोग से बड़े आंदोलन की तैयारी में हैं।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.