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तिगरी गंगा में बढ़ती गंदगी, शौचालय तक नहीं

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उपदेश देने वालों की भीड़ है लेकिन गंगा के लिए आगे आने को कोई तैयार नहीं.
गंगा की स्वच्छता का शोर बहुत बढ़ गया है। कई स्वयंसेवी संगठनों से जुड़े लोग तथा भगवाध्वजधारी इसके लिए सभायें और जुलूस निकाल रहे हैं, लोगों को गंगा को स्वच्छ बनाये रखने के उपदेश देने वालों की कोई कमी नहीं है लेकिन गंगा को गंदी करने के कारकों और कारणों से निजात दिलाने का कोई भी प्रयास नहीं हो रहा।

तिगरी गांव में गंगा तट पर शवों का दाह संस्कार करने का तांता लगा रहता है। लोग भारी संख्या में दूर-दराज से यहां रात-दिन आते-जाते रहते हैं। खुले में शौच के खिलाफ सरकार करोड़ों रुपये प्रचार में खर्च कर रही है, लेकिन यहां गंगा तट पर शौचालयों की तो बात छोड़िए कोई पेशाबघर तक नहीं बनवाया गया है।

यहां जले शवों की राख, पूजा सामग्री, पन्नी और प्लास्टिक की थैलियों तथा प्लास्टिक के गिलास और दूसरे सामानों को गंगा में लगातार फेंका जा रहा है। इस तरह का कचरा यहां गंगा जल में अटा पड़ा है और उसे प्रदूषित करने में अपना सहयोग दे रहा है।

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शौचालयों तथा पेशाबघरों के अभाव में लोग गंगा को ही उपयोगी मान, काम तमाम करने को बाध्य होते हैं। ग्राम प्रधान, खंड विकास अधिकारी से लेकर डीएम तक को सारी स्थिति का ज्ञान है। सारे जनप्रतिनिधि भी आयेदिन किसी न किसी बहाने गंगा तट पर आते हैं लेकिन गंगा को गंदी करने के मूल कारणों का निराकरण करने में कोई दिलचस्पी नहीं रखते।

विपक्ष में रहते हुए भाजपा की फायर ब्रांड साध्वी उमा भारती कई बार ब्रजघाट पर गंगा तट पर गंगा की स्वच्छता का जोरशोर से राग अलापती रहीं और लोगों से केन्द्र में भाजपा की सरकार बनवाने पर सौ दिन में गंगा को स्वच्छ कराने का दावा करती रहीं। परंतु सरकार बनने के चार साल बीतने पर उन्होंने इस ओर तनिक भी ध्यान नहीं दिया बल्कि गंगा और गंदी हो गयी।

गंगा के तथाकथित भक्तों के उपदेश, भाषण और प्रदर्शन अब भी जारी हैं। उसी रफ्तार से गंगा भी स्वच्छ होने के बजाय गंदी होती जा रही है। ब्रजघाट और तिगरी उसका साक्षात प्रमाण है।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.