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दीपावली पर आतिशी ज़हर घोलने से बचें : जनसचेतक, जागरुक नागरिक और पर्यावरण चिंतकों का संदेश

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आतिशबाजी को लेकर पर्यावरण सुरक्षा की बाबत कई जागरुक लोगों से चर्चा पढ़ें...
बढ़ते प्रदूषण का कुप्रभाव शहरों से देहात तक है। प्रदूषण जनित बीमारियों के शिकार बच्चे, बूढ़े, जवान सभी हैं तथा गर्भस्थ शिशुओं तक पर प्रदूषण की मार है। इस चिंताजनक स्थिति से हम सभी दो-चार हैं लेकिन इस भयावह बीमारी पर नियंत्रण के प्रति अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। सर्वाेच्च अदालत को इसे गंभीरता से लेकर दीपावली और विवाह आदि में आतिशबाजी को कम करने का आदेश देना पड़ा है। फिर भी कई लोग इस पर हो-हल्ला करने पर उतर आए हैं। समाज के जागरुक लोगों को इसमें आगे आना होगा। हमने दीपावली और शादी तथा अन्य समारोहों पर आतिशबाजी को लेकर पर्यावरण सुरक्षा की बाबत कई जागरुक लोगों से चर्चा की। उनके विचारों को दीपावली से पूर्व पाठकों के बीच ले जाने का प्रयास कर रहे हैं :

'पहले ही जहरीले हो चुके वातावरण को और जहरीला नहीं होने देना चाहिए' -चौ. शूरवीर सिंह

'आतिशबाजी अविलम्ब बंद होनी चाहिए, दिवाली का वास्तविक आनन्द तभी मिलेगा' -डॉ. बीएस जिन्दल

'दिवाली के मौके पर सुगंधित सामग्री के बजाय आतिशबाजी करना किसी भी तरह उचित नहीं' -नवीन गर्ग

'दिवाली पर गलत परंपराओं को समाप्त करने से ही ह​म सब का भला है' -प्रमोद कुमार गर्ग

'दीपावली ज्ञान के प्रकाश का पर्व है, इसे खतरनाक धुंध से बचाना होगा' -अरविन्द अग्रवाल

'केवल वायु ही दूषित नहीं हो रही बल्कि तमाम खाद्य पदार्थों में भी जहर घुल रहा है' -डॉ. एल.सी. गहलौत

'आतिशबाजी हर प्रकार की गंदगी को पैदा करती है, इससे बचना ही बेहतर है' -डॉ. श्याम सिंह