चुनाव प्रचारक नरेन्द्र मोदी
पांच साल से ये तीनों देख रहे हैं कि दोनों चुनावों के बीच सरकार उन्हें भूल गयी थी.
पिछले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने गांव, गरीब और किसानों का राग अलाप कर उनके अच्छे दिन लाने का भरोसा दिया था। इस बार फिर से चुनाव आते ही भाजपा नेताओं विशेषकर पार्टी के प्रमुख चुनाव प्रचारक नरेन्द्र मोदी को इन तीनों की कुछ ज्यादा ही चिंता होनी शुरु हो गयी है।

पांच साल से ये तीनों देख रहे हैं कि दोनों चुनावों के बीच सरकार उन्हें भूल गयी थी तथा जो कुछ किया गया वह सरकारी सेवाओं में लगे लोगों, बड़े उद्योगपतियों तथा नेताओं के लिए किया गया। इसके विपरीत आम आदमी पर जीएसटी के बहाने भारी बोझ लाद दिया गया। ग्रामीण मजदूर और छोटे किसानों की हालत गांवों में जाकर देखी जाये तो पता चल जायेगा। पिछले दिनों पांच राज्यों में भाजपा के पराजित होने से भाजपा चिंता में पड़ी है और उसने फिर से गांव, गरीब और किसान को खुश करने की कोशिश की।

इस कोशिश में किसानों को प्रति किसान छह हजार रुपये वार्षिक सहायता का बजट तैयार किया। मजेदार बात यह है कि पहले उन्हें दो हजार रुपये देने की बात है बाद में दो किश्तें दी जानी हैं। यानी किसानों को दो हजार देकर वोट खरीदने की तैयारी है।

भाजपा नेता जानते हैं कि तेलंगाना सरकार ने किसानों को प्रति एकड़ आठ हजार सहायता पहले ही जारी कर रखी थी जिसे अब दस हजार प्रति एकड़ कर दिया है। जबकि भाजपा पांच एकड़ तक के किसानों को मात्र छह हजार ही देकर बहलाना चाहती है। इससे भला किसान कैसे खुश होंगे। जबकि पहले ही बिजली बिल दोगुने कर दिये। यूरिया कट्टा 50 किलो के बजाय 45 किलो कर दिया। ट्रैक्टरों, उनके पुर्जों और अन्य कृषि यंत्रों पर भारी भरकम टैक्स लाद दिया। किसान जानता है कि सरकार उसके साथ क्या सलूक कर रही है। वह यह भी समझ गया है कि उद्योगपतियों, नौकरशाहों, फिल्मकारों तथा अमीरज़ादों के साथ भाजपा कितना सहयोग कर रही है?

~जी.एस. चाहल.