कांग्रेस गठबंधन टकराव मंडल
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कम से कम एक दर्जन लोकसभा सीटों पर अच्छा प्रभाव रखती है.

भाजपा से उत्तर प्रदेश में लोकसभा की सीट छीनने के लिए मायावती और अखिलेश यादव जीतोड़ कोशिश में लगे हैं, मगर राष्ट्रीय स्तर की कांग्रेस पार्टी से महागठबंधन न होने से खासतौर से मुरादाबाद-बरेली मंडल में सपा-बसपा की जीत आसान दिखायी नहीं देती। एक आकलन के अनुसार जनपद अमरोहा की सीट बसपा के खाते में जाने से सपा ने भी अपने बूथ कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए गत सप्ताह प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में ताबड़तोड़ बैठकें करके कार्यकर्ताओं को समझाते हुए जय-भीम के नारे लगवाए। अमरोहा में सपा के कद्दावर नेता महबूब अली, उनके बेटे और विधान परिषद सदस्य परवेज अली ने बैठकें कीं तो हसनपुर विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मंत्री कमाल अख्तर ने जय-भीम के नारे लगवाए। धनौरा में पूर्व मंत्री जगराम सिंह बीमार होने पर भी बैठकों में मौजूद रहे।

सपा-बसपा को इससे मजबूती मिली वहीं दूसरी ओर कांग्रेस से गठबंधन न होने से पार्टी प्रवक्ता राशिद अल्वी ने अमरोहा, उझारी, मोहरका में बैठकें कीं। मुरादाबाद में राजबब्बर जमकर गरजे। प्रियंका गांधी के पति राबर्ट वाड्रा के पोस्टर तक लगाये गये लेकिन कांग्रेस अभी अपने पत्ते नहीं खोल रही है।

चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कम से कम एक दर्जन लोकसभा सीटों पर अच्छा प्रभाव रखती है जिनमें मुरादाबाद-बरेली शामिल हैं। सपा-बसपा ने आने वाले चुनाव में रणनीति नहीं बदली तो इसका सीधा लाभ भाजपा को होगा। वैसे सपा-बसपा का उत्तराखंड और मध्य प्रदेश का गठबंधन भाजपा को ही लाभ पहुंचायेगा।
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भाजपा को पराजित करने के लिए जय-भीम का नाराम मिलकर लगाना अच्छी बात है मगर जहां बसपा चुनाव सपा को लड़ायेगी वहां बसपा कार्यकर्ता भी मुलायम सिंह यादव जिन्दाबाद दिल से लगाने को मजबूर होंगे। इसी में जीत का फॉर्मूला है।

संभल सीट सपा की जीत के लिए आसान सीट है मगर अमरोहा और मुरादाबाद में कांग्रेस की नाराजगी सपा-बसपा गठबंधन को महंगी पड़ेगी। ये स्थिति बरेली में भी है जहां कांग्रेस जीती थी। बिजनौर और नगीना सीट भी सपा-बसपा गठबंधन को नाको-चने चबायेगी। रामपुर में कांग्रेस की नूरबानो भी अपना राजनीति में मजबूत स्थान रखती हैं।

~टाइम्स न्यूज़ मुरादाबाद.