कांग्रेसी नेता राशिद अल्वी
कांग्रेस का पंजा रोक देगा हाथी-साइकिल की रफ्तार.

प्रदेश में कांग्रेस को सपा-बसपा गठबंधन से बाहर रखने से जहां गठबंधन को नुक्सान होगा वहीं भाजपा को इससे लाभ पहुंचेगा। गठबंधन से यह लोकसभा सीट बसपा के खाते में आयी है और कांग्रेसी नेता राशिद अल्वी ने यहां से चुनाव लड़ने की इच्छा जतायी है। यदि ऐसा होता है तो यहां भाजपा-बसपा की सीधी टक्कर त्रिकोण में बदल जाएगी। ऐसे में भाजपा को हराना नामुमकिन होगा और गठबंधन उम्मीदवार की जीत निश्चित पराजय में बदल जायेगी।

2014 में उत्तर प्रदेश में भाजपा की ऐतिहासिक जीत का प्रमुख कारण विरोधी दलों खासकर कांग्रेस, सपा, बसपा और रालोद के मतों को विभाजन था। यह बिल्कुल सही है कि सपा, बसपा और रालोद गठबंधन भाजपा को जबरदस्त टक्कर देकर उसे बहुत पीछे धकेल देगा। क्योंकि समाज के जिन वर्गों का समर्थन इन तीनों दलों को यहां मिल रहा है उनका मत प्रतिशत भाजपा के मत प्रतिशत से अधिक है। उसका पूरा लाभ गठबंधन दलों को तभी मिल सकता है जब उसमें से कांग्रेस कटिंग न कर पाए बल्कि भाजपा के मतों में सेंधमारी करे लेकिन गठबंधन के तीनों दलों की तरह कांग्रेस की निगाह भी मुस्लिम, दलित और कृषक वर्ग के मतदाताओं पर है। ऐसे में कांग्रेस के गठबंधन से अलग लड़ने पर गठबंधन को अनेक सीटों पर हानि उठानी पड़ेगी। यह जरुरी नहीं कि इससे कांग्रेस को वांछित लाभ हो लेकिन यह जरुर है कि इससे भाजपा को संजीवनी मिल जायेगी। ऐसे में विरोधियों की लड़ाई में भाजपा को बिना कुछ किए लाभ मिल जायेगी।

अमरोहा सीट से यदि कांग्रेस राशिद अल्वी या किसी दूसरे नेता को मैदान में लाती है तो वह यहां भाजपा के लिए वरदान सिद्ध होगा। इस बार गठबंधन के कारण भाजपा उम्मीदवार खतरे में माना जा रहा था लेकिन कांग्रेस के मैदान में कूदने से भाजपा को मजबूती मिल जायेगी।

~टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.