अमरोहा संसदीय सीट : महबूब जीते, चेतन व कमाल हारे

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राजीव तरारा, महेन्द्र सिंह खड़गवंशी तथा कमल सिंह ने भाजपा का ध्वज नहीं झुकने दिया.
इस लोकसभा क्षेत्र में इस बार भाजपा उम्मीदवार कंवर सिंह तंवर की हार और बसपा उम्मीदवार कुंवर दानिश अली की जीत से भाजपा और सपा के कई ऐसे नेताओं की जमीनी पकड़ का राज़ खुल गया है जिन्हें अपने-अपने दलों में मजबूत स्तंभ माना जाता था। इस चुनाव में हार-जीत कंवर और कुंवर में नहीं हुई बल्कि यहां जय-पराजय स्थानीय दिग्गजों के बीच हुई है।

देशभर, विशेषकर हिन्दी पट्टी में मोदी लहर 2014 की तर्ज से भी ऊपर चली जबकि यह लहर अमरोहा लोकसभा क्षेत्र सहित मुरादाबाद मंडल की तमाम लोकसभा सीटों पर बिल्कुल निष्प्रभावी रही। हालांकि 2014 में इन सभी सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। इस लेख में हम केवल अमरोहा लोकसभा सीट की समीक्षा ही करेंगे। मुरादाबाद मंडल का उल्लेख प्रसंगवश कर दिया है।

अमरोहा संसदीय सीट में पांच विधानसभा सीटें हैं। इस बार यहां भाजपा इनमें से तीन सीटों पर आगे रही जबकि दो सीटों पर उसे भारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। मजेदार बात यह रही कि नौगांवा सादात से विधायक बने चेतन चौहान प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और उन्हीं की सीट पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। यही नहीं उससे सटी अमरोहा सीट पर भाजपा 90 हजार के करीब पिछड़ गयी। अमरोहा की धनौरा, हसनपुर, तथा गढ़मुक्तेश्वर तीनों सीटों पर भाजपा विधायकों राजीव तरारा, महेन्द्र सिंह खड़गवंशी तथा कमल सिंह ने भाजपा का ध्वज नहीं झुकने दिया। तीनों विधानसभा सीटों से तंवर को बढ़त दिलायी।

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कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान को सपा विधायक महबूब अली और उनके एमएलसी बेटे ने अपने क्षेत्र में जनमत विहीन कर दिया। इससे भाजपा के तीन विधायकों की मेहनत भी बेकार गयी। यह कहना ज्यादा बेहतर होगा कि अमरोहा में मोदी लहर को कायम रखने में कंवर और चेतन चौहान विफल रहे जबकि यहां महबूब लहर सब पर भारी पड़ी।

अमरोहा और नौगांवा विधानसभा सीटों पर भाजपा की रिकार्ड हार का एक कारण जहां महबूब अली और चौ. चन्द्रपाल सिंह की कोशिश रहा वहीं इसके लिए चेतन चौहान और कंवर सिंह तंवर उससे भी बड़े जिम्मेदार हैं। ये दोनों नेता क्षेत्र के आम आदमी से मिलने से बचते रहे हैं तथा चन्द चाटुकारों और ठेकेदारों के साथ इनके सम्बन्ध रहे हैं। इनका संपर्क क्षेत्र भी केवल अमरोहा कलैक्ट्रेट रहा। बड़े अधिकारियों से बात कर ये अपने दायित्व की पूर्ति मानते रहे हैं। विधायकों के क्षेत्र में भाजपा की जीत और कैबिनेट मंत्री के क्षेत्र में करारी हार का क्या कारण है?
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यहां भाजपा कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। वे इस बात से बहुत आहत हैं कि उनके भारी प्रयास और मोदी लहर के बावजूद उन्हें हार का सामना करना पड़ा। कंवर सिंह तंवर और चेतन चौहान का अपने कार्यकाल में जनता से अछूतों सा व्यवहार इस पराजय का बड़ा कारण है।

उधर समाजवादी पार्टी में यहां के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनपद में सपा में महबूब अली से मजबूत दूसरा कोई नेता नहीं। कमाल अख्तर एक बार फिर से इन नतीजों से बहुत कमजोर नेता सिद्ध हुए हैं। उनके विधानसभा क्षेत्र में जिले की चारों विधानसभाओं में भाजपा को सबसे बड़ी बढ़त हासिल हुई है। ऐसे में वे महबूब अली के बरक्स कहीं भी नहीं ठहरते। क्षेत्र में उनकी पकड़ बहुत कमजोर पड़ती जा रही है।

इन नतीजों ने केवल कंवर सिंह तंवर को ही नसीहत नहीं दी बल्कि भाजपा और सपा के कई बड़े नेताओं की जमीनी हकीकत का भी भंडा फोड़ किया है।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.

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