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गजरौला के आधा दर्जन से अधिक स्कूल भयंकर प्रदूषण की जद में.

तकरीबन आधा दर्जन स्कूलों के बच्चे भयंकर प्रदूषण की चपेट में हैं। ये सभी स्कूल प्रदूषण वाहक फैक्ट्रियों के पास स्थित हैं। इन स्कूलों में प्रवेश से कक्षायें पूरी कर जाने तक बच्चे अपने साथ कई भयंकर बीमारियां ले जा रहे हैं। कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी के कई बच्चों में लक्षण पाए गये हैं जबकि अस्थमा, खांसी तथा ब्लड प्रेशर, दृष्टि दोष तथा चर्म रोगों की जांच की जाये तो ऐसे रोगों के लक्षण भी इन स्कूलों के बच्चों में मिल सकते हैं। घटते-बढ़ते ब्लड प्रेशर और तनाव के कारण कई बच्चों का व्यवहार हताशा, अवसाद और झगड़ालू होता जा रहा है। इन स्कूलों के सभी बच्चों की स्वास्थ्य और मनोचिकित्सा बहुत जरुरी है। आपाधापी तथा व्यस्त जीवन के कारण कई अभिभावक बच्चों के स्वास्थ्य तथा स्कूली वातावरण से बिल्कुल अनिभिज्ञ होते जा रहे हैं। उनकी सारी शक्ति केवल बच्चों को किताबी कीड़ा बनाने पर लगी रहती है।

नगर के नोबल पब्लिक स्कूल, सिद्धार्थ इंटर कालेज, सेंट सैफ इंटर कालेज और सेंट मैरीज़ कान्वेंट स्कूल के साथ ही नाईपुरा में एक प्राथमिक परिषदीय स्कूल भी है। ये सभी स्कूल प्रदूषण वाहक फैक्ट्रियों के इतने निकट स्थित हैं कि जुबिलेंट सहित यहां की तमाम फैक्ट्रियों का प्रदूषण इन स्कूलों में फैला रहता है। इन स्कूलों के अंदर पहुंच कर भयंकर दुर्गंध का स्पष्ट अहसास होता है और पता चलता है कि स्कूलों के छात्र और अध्यापक कितने खतरनाक माहौल में जीवन जी रहे हैं।
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नोबल पब्लिक स्कूल दक्षिण और पश्चिम दो ओर से जुबिलेंट के ऐसे प्लांटों से सटा है जो सर्वाधिक खतरनाक प्रदूषण प्रवाहित करते रहते हैं। हालांकि जिन अन्य स्कूलों का नाम हम ऊपर लिख चुके वे सभी खतरनाक प्रदूषित वायु के दायरे में हैं।

स्कूल, कालेज कई सुरक्षा मानकों को धता बताकर संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने में सफल होते रहे हैं। इसी के साथ प्रतिवर्ष अथवा नियत समयावधि पर उनका नवीनीकरण भी होता आ रहा है। यह सब ऊंची पहुंच और धन कमाने के लिए स्कूल मालिक करते कराते आ रहे हैं लेकिन अभिभावक उल्टे अपनी जेब का धन फूंक कर अपने बच्चों को जीवन भर के लिए भयंकर  रोगों के हवाले कर रहे हैं।

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खतरा केवल वायु प्रदूषण का ही नहीं है बल्कि यहां कई बार भयंकर औद्योगिक दुघर्टनायें हुई हैं तथा इस तरह की दुर्घटनायें जान-माल दोनों को नुक्सान पहुंचाती रहती हैं। नोबल पब्लिक स्कूल के पास हाइवे पर एक टैंकर में इतना खतरनाक विस्फोट हुआ कि उसका एक हिस्सा मिसाइल की तरह उड़कर स्कूल की बगल में गिरा। टैंकर की अच्छी तरह सफाई न करने के बावजूद उसमें वैल्ड करने से यह सब हुआ। टैंकर यहां की एक कम्पनी का कैमिकल ढोने का काम करता था।
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जिले के प्रशासन, शिक्षा विभाग और संबंधित विभागों के अधिकारियों को ऐसे सभी स्कूलों और कालेजों में सुरक्षा मानकों और बच्चों के स्वास्थ्य की सघन जांच करनी और करानी चाहिए जो स्कूल प्रदूषित क्षेत्र में स्थित हैं। खतरनाक प्रदूषित क्षेत्र में स्थित सभी स्कूलों को यहां से अविलम्ब स्थानांतरित कराया जाना चाहिए। जो स्कूल संचालक ऐसा न कर सके उसके स्कूल की मान्यता त्वरित कार्रवाई के तहत रद्द किए जाने की जरुरत है।

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बच्चों के अभिभावकों को शिक्षा से पहले बच्चों के स्वास्थ्य की चिंता होनी चाहिए। अस्वस्थ बच्चे न तो ठीक से पढ़ सकते हैं और न ही सुखी जीवन जी सकते हैं। अभिभावक स्कूल वालों से बड़े दोषी हैं। उनके खिलाफ भी प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए।

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-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.