अवसाद से घिरे लोगों को जीने की नई राह दिखा रहीं योग प्रशिक्षक दीपा सिरोही

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योग प्रशिक्षक दीपा सिरोही को अमरोहा में सम्मानित भी किया गया.
नगर में योग प्रशिक्षक के रूप में लोगों को योग के प्रति जागरुक करने का कार्य कर रही राष्ट्रीय खेल प्राधिकरण से शिक्षा प्राप्त योग प्रशिक्षक दीपा सिरोही ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय अमरोहा में दो दिवसीय विशेष शिविर के दौरान जनपद के पुलिस कार्मिकों को योग का प्रशिक्षण देते हुए विभिन्न योगिक क्रियाओं की महत्ता से अवगत कराया तथा नियमित योगाभ्यास करने का आह्वान किया। इस अवसर पर उन्होंने योग के साथ-साथ आहार की शुद्धता पर भी जोर दिया एवं कैंसर मधुमेह व तरह-तरह की विषम व्याधियों से मुक्ति के लिए योग को एक मात्र सार्थक साधन कहा।

इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक अमरोहा विपिन टाडा ने पुलिस कार्मियों को योग प्रशिक्षण के माध्यम से स्वस्थ रहने का एवं शुद्ध आहार का संदेश देने वाली योग प्रशिक्षक दीपा सिरोही को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

दीपा सिरोही ने इस अवसर पर कहा की योग पूर्ण रूप से स्वस्थ रहने तथा शारीरिक मानसिक व आत्मिक उन्नति का साधन है, अतः दूषित खान पान और प्रदूषित वातावरण की विषम परिस्थितियों में पूर्ण स्वस्थ रहने का मूल मंत्र योग ही है इसलिए नियमित योगाभ्यास करें और स्वस्थ व निरोग रहे। इस अवसर पर डॉ यतींद्र कटारिया विद्यालंकार योग की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए विश्व भर में योग एवं आयुर्वेद के बढ़ते प्रभाव पर विस्तार से बताया।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की अब की बार पर्यावरण थीम के अनुसार पुलिस अधीक्षक कार्यालय कैंपस में दो दिवसीय योग प्रशिक्षण 23 जून रविवार को संपन्न हुआ था। जिसमें पुलिस अधीक्षक डा.विपिन ताडा के आह्वान पर पुलिसक्षेत्राधिकारी, प्रभारी निरीक्षक, उप-निरीक्षक,तथा महिला पुरुष आरक्षी ने नियमित योग क्लासेज मे शामिल हो लाभ उठाया।

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कौन हैं दीपा सिरोही? क्यों बनीं योग प्रशिक्षक? 

भोजन की तरह योग भी जीवन के लिए जरूरी राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में भाग ले चुकी हैमर थ्रो की राष्ट्रीय खिलाड़ी दीपा सिरोही योग के जरिए लोगों को मानसिक अवसाद से उबारने का काम कर रही हैं। कहती हैं, स्वस्थ्य जीवन के लिए तो योग और प्राणायाम उतना ही जरूरी है, जितना जीवित रहने के लिए भोजन। पिता की बीमारी के बाद जब खुद अवसाद में चली गईं तो इसी योग के सहारे उन्होंने नया जीवन शुरू किया और खेले कोटे से मिली सरकारी नौकरी को त्यागकर लोगों की भलाई के लिए जीवन समर्पित कर दिया।

अमरोहा के मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र के गांव मल्हूपुरा निवासी किसान चौधरी यशपाल सिंह की 27 वर्षीय बेटी दीपा सिरोही अवसाद से घिरे लोगों को जीने की नई राह दिखा रही हैं। वैसे वह वर्ष 2011 में लखनऊ में आयोजित जूनियर नेशनल चैंपियनशिप तथा 2014 में चेन्नई में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में हैमर थ्रो में भी सफलता पूर्वक भाग ले चुकी हैं। खेलों में रुचि के कारण ही वर्ष 2015 खेल कोटे से रेलवे में नौकरी लग गई। लेकिन उसी समय उन्हें बीमार पिता को कैंसर होने की जानकारी मिली। चूंकि दीपा बचपन से ही पिता के करीब रही हैं और पिता की भी वह दुलारी रही हैं। ऐसे में पिता को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से मृत्यु के बाद दीपा अवसाद में चली गईं। पिता की सेवा मे रात-दिन एक कर देने की वजह से उन्होंने स्पोर्ट्स कोटे से मिलने वाली नौकरी को भी कोई अहमियत नहीं दी। और उन्होंने योग के जरिए लोगों मे बढते अवसाद, डायबिटीज, ब्लड-प्रैशर, मोटापा, तथा अमरोहा जनपद के ग्रामीणों में तेजी से महामारी बनने वाले कैंसर के खात्मे के लिए संकल्प लिया की वह लोगों मे खानपान और असंयमित जीवनशैली, तथा जहरीली हो चुकी जमीन और उसमें उगाए जाने वाले खाद्य पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता अभियान चला योग से असाध्य बीमारियों के निदान हेतु समर्पित रहेगी।
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दीपा के भाई उमेंद्र सिरोही भारतीय सैन्य अकादमी खड़गवासला के अलावा देश-विदेश में बतौर हैल्थ इंस्ट्रक्टर सेवाएं प्रदान कर चुके हैं। प्रशिक्षु सैन्य अधिकारियों के प्रशिक्षण में शामिल रहने के की वजह से उनका घर पर भी कम ही आना जाता है। लेकिन पिता की बीमारी से असामायिक मृत्यु से बहन के अवसाद की सूचना पर वह घर पहुंचे और करीब एक माह तक दीपा को योग और प्राणायाम के जरिए अवसाद से उबारा। अवसाद से उबरने के बाद दीपा ने अपने ही जैसे युवाओं को याेग के जरिए अवसाद से उबारने का संकल्प लिया। अब वह मंडी धनौरा के एमएस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में योग की क्लासेज चलाती हैं और बड़ी संख्या में लोगाें को अवसाद से उबारकर जीने की राह सिखा चुकी हैं। इस काम में दीपा के पति मुनेंद्र जो कि हरियाणा में शिक्षक हैं उनका भी खूब साथ मिला। उन्होंने भी पिता की देखभाल और लोगों को अवसाद से उबारने के संकल्प में उनका साथ दिया। दीपा कई बार जनपद स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में पुलिस कर्मियों को योग व प्राणायाम का प्रशिक्षण दे चुकी हैं, ताकि पुलिसकर्मी तनाव भरे माहाैल में अपने कर्त्तव्यों ठीक ढंग से निर्वहन कर सकें। गंगाा धाम तिगरी में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले पश्चिम उत्तर भारत के ऐतिहासिक गंगा मेले में भी दीपा ने श्रद्धालुओं को चार दिन तक योगाभ्यास कराया था।

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अवसाद से बचने को नियमित योग व प्राणायाम मंत्र :

दीपा सिरोही अवसाद से उबरने और इससे बचने को नियमित रूप से योग व प्राणायाम करने का मंत्र देती हैं। इसका बड़ी संख्या में लोग लाभ भी उठा चुके हैं। मंडी धनौरा के शिव कुमार अग्रवाल कपड़े वाले का कई साल से अवसाद का इलाज चल रहा था, लेकिन दीपा की योग क्लासेज में आने के बाद उनका अवसाद तो दूर हुआ ही, साथ ही अब बिना दवा के सामान्य जीवन जी रहे हैं। अनुष्का चाहल पढ़ाई में सामान्य होने की वजह से खुद की क्षमता को कम आंकने लगी थी, लेकिन नियमित रूप से योग और प्राणायाम करने से सामान्य जीवन जी रही हैं। इसी तरह से पढ़ाई में कमजोर छात्रा शगुन, पीठ दर्द की बीमारी की वजह से तेजपाल सिंह व सुरेश सिंह तथा एडवोकेट बरन सिंह, एडवोकेट अनुराग सिंह, कातिब करनसिंह लगातार बैठने की वजह से दैनंदिन कार्यों में असहज महसूस करते थे लेकिन लेकिन अब दीपा की योग क्लासेज में आने से उनके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है।

योग प्रशिक्षिका दीपा सिरोही के अनुसार रिसर्चरों ने पाया है कि योग और ध्यान पर आधारित माइंडफुलनेस नाम की तकनीक का अभ्यास लोगों में तनाव का स्तर कम कर रहा है। यह दिमाग की शक्ति बढ़ाने, याददाश्त और इम्युनिटी को भी बेहतर बना रहा है।

-मंडी धनौरा से महिपाल सिंह.

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