सूखे में बिजली कटौती कर रही कोढ में खाज का काम

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लहलहाती फसलें बरबादी की ओर हैं, किसान बीस घंटे बिजली की मांग कर रहे हैं.
भयंकर गर्मी और सूखे के कारण जहां खड़ी फसलों में सिंचाई की बहुत जरुरत है वहीं ग्रामांचलों में बिजली कटौती से किसान परेशान हैं। इस समय गांवों को आठ से दस घंटे मुश्किल से बिजली मिल रही है। कहीं-कहीं ट्रांसफार्मर फुकने और लाइनें खराब होने से हालात और भी बदतर हैं। दूसरी ओर बिजली बिल भुगतान की सख्ती से अन्नदाता दोहरी मुसीबत में है। किसान यूनियन और दूसरे किसान संगठनों के नेतृत्व में किसान कभी बिजलीघरों और कभी तहसील और मंडी स्थलों पर सभाएं कर अपनी दिक्कतों का रोना रो रहे हैं। कई जगह किसानों और बिजली अफसरों में गरमा-गरम नोकझोंक भी हो रही है। सब कुछ जानते हुए बिजली अधिकारी और प्रशासन समस्याओं का समाधान कराने में असमर्थ हैं।

इस समय खेतों में मुख्य रुप से गन्ना, हरा-चारा, लौकी, तुरई, खीरा, तरबूज, टमाटर आदि की फसलें खड़ी हैं। इन सभी फसलों में सिंचाई की बहुत जरुरत है। सब्जियों की फसलें एक-दो दिन की देरी में ही सूखे मौसम में सिंचाई खिंचने से बरबाद होने लगती हैं। जिस तरह लगातार सूखा पड़ रहा है तथा पारा ऊपर खिसक रहा है उससे समस्या और भी जटिल हो गयी है। केवल सब्जियां, चारा और गन्ना ही नहीं बल्कि आम और अमरुद के बागों में भी पानी लगातार चलाना पड़ रहा है। बिजली पर्याप्त न मिलने से तमाम किसान और बागवान परेशान हैं। सूखे तथा बिजली कटौती ने किसानों को रुला दिया है।
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जिले में इस बार किसानों ने टमाटर की फसल उगायी है। टमाटर पक रहे हैं। पानी की कमी और सूखे की मार से लहलहाती और टमाटर लदी फसल बरबाद होनी शुरु हो गयी है। हालांकि किसानों को टमाटर का अच्छा मूल्य मिलने से उनके चेहरों पर खुशी थी लेकिन मौसमी मार ने उनके अरमानों को कुचलना शुरु कर दिया है। मानसून की देरी की भविष्यवाणी से किसानों की चिंता बढ़ी है। भाकियू समेत तमाम किसान संगठनों के नेताओं ने सरकार से गांवों को कम से कम बीस घंटे बिजली देने की मांग की है।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.

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